स्थान – खटीमा/ऊधम सिंह नगर
रिपोर्टर – अशोक सरकार


मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत फॉर्म-7 के जरिए दर्ज की जा रही आपत्तियों को लेकर खटीमा में सियासी विवाद गहरा गया है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विधायक भुवन कापड़ी के नेतृत्व में खटीमा तहसील का घेराव कर आपत्तियों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की। वहीं प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अब तक किसी भी मतदाता का नाम आपत्ति के आधार पर नहीं काटा गया है और गलत पाए जाने वाले दावों को नियमानुसार खारिज किया जाएगा।


कांग्रेस कार्यकर्ता विधायक भुवन कापड़ी के नेतृत्व में तहसील पहुंचे और उप जिलाधिकारी तुषार सैनी से मुलाकात कर SIR के तहत फॉर्म-7 से जुड़ी आपत्तियों की जांच कराने की मांग की। विधायक कापड़ी ने आरोप लगाया कि पहले ऑनलाइन फॉर्म-7 के माध्यम से आपत्ति दर्ज होने के बाद उसकी जानकारी फॉर्म-10 में अपडेट हो जाती थी। इससे आपत्ति दर्ज करने वाले व्यक्ति और जिस मतदाता के नाम पर आपत्ति लगाई गई है, दोनों की जानकारी स्पष्ट रहती थी।


कापड़ी का आरोप है कि अब बड़ी संख्या में ऑफलाइन फॉर्म-7 जमा किए जाने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई ऐसे लोगों के नाम पर आपत्तियां दर्ज की गई हैं, जिन्हें इसकी जानकारी तक नहीं है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रम और तनाव की स्थिति बन रही है।


विधायक के मुताबिक विरोध के बाद करीब एक हजार फॉर्म-7 तहसील पहुंचने की बात सामने आई, लेकिन आरके रूम और एसडीएम के स्टेनो द्वारा उन्हें रिसीव नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इन फॉर्मों को आधिकारिक तौर पर रिसीव नहीं किया गया तो ये तहसील परिसर तक कैसे पहुंचे और इन्हें किसने जमा किया।
मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए विधायक ने तहसील परिसर की CCTV फुटेज उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक पात्र मतदाता के वोट के अधिकार की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है। किसी भी कीमत पर लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।



कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेशभर में भाजपा सरकार के संरक्षण में मतदाताओं के वोट काटने की साजिश की जा रही है। पार्टी ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।



प्रशासन ने कहा- अभी किसी का वोट नहीं कटा
वहीं, कांग्रेस के आरोपों पर खटीमा के उप जिलाधिकारी तुषार सैनी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि अब तक प्राप्त किसी भी आपत्ति के आधार पर किसी मतदाता का वोट नहीं काटा गया है। उन्होंने बताया कि आपत्तियों पर 15 दिन का समय दिया गया है।

एसडीएम ने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत सभी आपत्तियों की जांच की जाएगी। यदि किसी व्यक्ति की ओर से गलत आपत्ति दर्ज की गई पाई जाती है तो उसे नियमानुसार खारिज कर दिया जाएगा।

फिलहाल SIR के तहत फॉर्म-7 से जुड़ी आपत्तियों को लेकर कांग्रेस और प्रशासन के अलग-अलग दावों के बीच मामला गरमा गया है। अब जांच और सत्यापन की प्रक्रिया के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दर्ज आपत्तियों में कितनी सही हैं और कितनी गलत।

