ईरान में कौन हैं मोहम्मद बाक़र ख़राज़ी, जिनके दावों से मचता है सियासी हलचल?

ईरान में कौन हैं मोहम्मद बाक़र ख़राज़ी, जिनके दावों से मचता है सियासी हलचल?

ब्यूरो रिपोर्ट

ईरान की सत्ता व्यवस्था में समय-समय पर ऐसे प्रभावशाली लोग सामने आते रहे हैं, जिनके पास कोई औपचारिक सरकारी पद नहीं होता, लेकिन सत्ता के शीर्ष नेतृत्व और प्रभावशाली परिवारों से नजदीकी के कारण उनके बयानों को पूरी तरह नजरअंदाज करना आसान नहीं होता। मोहम्मद बाक़र ख़राज़ी भी ऐसे ही विवादास्पद चेहरों में शामिल हैं।

ख़राज़ी धार्मिक पृष्ठभूमि से आते हैं और ‘हिज़्बुल्लाह ईरान’ नामक संगठन के महासचिव हैं। हालांकि ईरानी राजनीति में इस संगठन की वास्तविक राजनीतिक हैसियत और प्रभाव को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं है। इसके बावजूद ख़राज़ी समय-समय पर सत्ता के अंदरूनी घटनाक्रम को लेकर ऐसे दावे करते रहे हैं, जिनसे ईरान की राजनीति में चर्चा तेज हो जाती है।

उनकी राजनीतिक पहुंच की एक वजह उनका पारिवारिक और धार्मिक नेटवर्क भी माना जाता है। उनका संबंध ऐसे परिवार से है, जिसके रिश्ते धार्मिक मदरसों, राजनयिक हलकों और ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व से जुड़े परिवारों तक बताए जाते हैं। इसी पृष्ठभूमि के कारण उनके बयानों को ईरान के सत्ता गलियारों से जोड़कर देखा जाता है।

हाल ही में मोहम्मद बाक़र ख़राज़ी ने दावा किया कि ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान 27 या 28 बार इस्तीफा दे चुके हैं या इस्तीफा देने की धमकी दे चुके हैं। उनके अनुसार, सर्वोच्च नेता मोजतबा ख़ामेनेई ने पेज़ेश्कियान के इस रवैये पर लिखित जवाब देते हुए कथित तौर पर कहा कि यदि राष्ट्रपति दोबारा इस्तीफा देते हैं तो उसे स्वीकार कर लिया जाएगा।

हालांकि, इन दावों को लेकर ईरानी राष्ट्रपति कार्यालय ने कड़ा रुख अपनाया। कार्यालय की ओर से पेज़ेश्कियान के इस्तीफे से जुड़े ख़राज़ी के बयानों को पूरी तरह झूठ और निराधार बताया गया। वहीं सर्वोच्च नेता के कार्यालय ने भी मोजतबा ख़ामेनेई से जुड़े उनके दावे का खंडन किया।

ख़राज़ी ने एक अन्य दावे में कहा था कि मोहम्मद बाक़र ज़ुलक़द्र को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव पद से हटाया जा रहा है और उनकी जगह मोहसिन रज़ाई को नियुक्त किया जाएगा। बाद में मोहसिन रज़ाई की नियुक्ति को मंजूरी मिलने के बाद उनके इस दावे की चर्चा और बढ़ गई।

उन्होंने यह दावा भी किया था कि विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची को बता दिया गया है कि अब उन्हें बातचीत में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं होगी। उनके ऐसे बयानों और बाद में सामने आने वाले आधिकारिक खंडनों ने ईरान के सत्ता तंत्र में उनकी भूमिका और पहुंच को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

ख़राज़ी के विवादित बयानों का सिलसिला नया नहीं है। इससे पहले भी वह ईरान से अलग हो चुके क्षेत्रों को वापस लेने के वादे, मुद्रा और डॉलर से जुड़े बड़े दावे, सरकार को तबाह करने की धमकियां, परमाणु हथियार बनाने के सुझाव और अमेरिका के तट पर सुनामी पैदा करने के लिए परमाणु हथियारों के इस्तेमाल जैसे बयान दे चुके हैं।

यही वजह है कि मोहम्मद बाक़र ख़राज़ी को लेकर सबसे बड़ा सवाल उनकी आधिकारिक भूमिका से ज्यादा उनकी पहुंच को लेकर है। उनके पास कोई प्रमुख सरकारी पद नहीं होने के बावजूद वह सत्ता के अंदरूनी फैसलों और शीर्ष नेतृत्व से जुड़े दावे सार्वजनिक रूप से कैसे करते हैं? और जब उनके कुछ दावों का आधिकारिक खंडन होता है, तब भी वे सार्वजनिक मंच पर लगातार सक्रिय कैसे बने रहते हैं? ईरान की जटिल सत्ता संरचना में ख़राज़ी की वास्तविक भूमिका इन सवालों के जवाब से ही स्पष्ट हो सकती है।