स्थान : हल्द्वानी
रिपोर्टर : संजय जोशी

रानीबाग स्थित माता जिया रानी की भूमि को कथित अतिक्रमण से मुक्त कराने की मांग को लेकर रविवार को पहाड़ी आर्मी के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन किया गया। पहाड़ी आर्मी के संस्थापक अध्यक्ष हरीश रावत के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शन में प्रसिद्ध इतिहासकार प्रोफेसर अजय रावत, पूर्व राज्यमंत्री एवं प्रमुख राज्य आंदोलनकारी हरीश पनेरू, डीआरडीओ के पूर्व वैज्ञानिक देवेंद्र सिंह खाती समेत सैकड़ों लोग शामिल हुए।


प्रदर्शनकारियों ने उत्थान मंच हीरानगर स्थित गोल्ज्यू मंदिर से पैदल मार्च शुरू किया। माता जिया रानी के जयकारों और कुमाऊंनी ढोल-नगाड़ों के साथ निकली रैली में पहाड़ी समाज के लोगों, महिलाओं और युवाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए रानीबाग स्थित जिया रानी की भूमि को तत्काल अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग उठाई।



पहाड़ी आर्मी के अध्यक्ष हरीश रावत ने कहा कि रानीबाग स्थित चित्रेश्वर धाम और जिया रानी की भूमि धार्मिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र कत्युरी राजाओं के वैभवशाली साम्राज्य का गवाह रहा है। प्रदर्शनकारियों ने जिया रानी की तपोभूमि और क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने की मांग की।


मंदिर समिति से जुड़े रमेश मनराल और चंदन मनराल ने कहा कि ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर की रक्षा के लिए पहाड़ी समाज लगातार लामबंद हो रहा है। उन्होंने रानीबाग स्थित चित्रेश्वर धाम, चित्रशिला घाट और जिया रानी की तपोभूमि के संरक्षण की मांग की। साथ ही उन्होंने क्षेत्र में बनाए गए शनि मंदिर को लेकर भी आपत्ति जताते हुए उसे अन्यत्र स्थापित करने की मांग रखी।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि चित्रेश्वर धाम, चित्रशिला घाट और रानीबाग क्षेत्र का धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व है। ऐसे में इस क्षेत्र की भूमि को कथित अतिक्रमण से मुक्त कराना जरूरी है। रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने जिया रानी की भूमि को सुरक्षित करने और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की।


पैदल मार्च सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारियों ने सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि रानीबाग क्षेत्र को मानसखंड मंदिर माला के तहत धार्मिक नगरी के रूप में विकसित किया जाए और जिया रानी की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।


ज्ञापन में प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि 10 दिनों के भीतर कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि इसके बाद पहाड़ी समाज के हजारों लोग स्वयं कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होंगे और किसी भी स्थिति में उत्पन्न होने वाली सामाजिक समस्या की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
प्रदर्शन में चित्रांगद रावत, पहाड़ी आर्मी जिला अध्यक्ष राजेंद्र कांडपाल, प्रेमा मेर, कविता जीना, राजेंद्र सिंह मनराल, चंदन सिंह मनराल, मनोहर सिंह, दिलीप कुमार चंद, विनोद कुमार जोशी, कमल जोशी, जय रावत, सीता रावत, हरेंद्र सिंह राणा, गीता बिष्ट, महेश चंद्र भट्ट, रमेश मनराल, उमा रौतेला, अंजू पांडे, रमेश सिंह रावत, आनंद सिंह कन्याल, विनोद सिंह नेगी, कमल जेठी, मोहन सिंह बोरा, सुजान सिंह दसौनी, प्रदीप रौतेला, कन्नू तिवारी, राज्य आंदोलनकारी राजेंद्र बिष्ट, मनोज सिंह रावत, दीपा बोरा, दीपा पांडे, दीपा मिश्रा और लाल सिंह रावत समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

