स्थान : हरिद्वार
रिपोर्टर : धर्म राज

सावन कांवड़ यात्रा अपने चरम पर पहुंच गई है। गुरुवार शाम छह बजे तक 39 लाख 15 हजार शिवभक्त हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए। वहीं यात्रा के आठवें दिन तक कुल 2 करोड़ 19 लाख 70 हजार कांवड़िये गंगाजल भर चुके हैं। श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या के बीच व्यवस्थाओं पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है।


हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे लाखों श्रद्धालुओं में बड़ी संख्या ऐसे शिवभक्तों की है, जो रात के समय पैदल यात्रा कर रहे हैं। लेकिन हरिद्वार-देहरादून हाईवे के कई हिस्सों में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं होने से उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।



श्रद्धालुओं का कहना है कि अंधेरे के कारण रास्ता पहचानने में कठिनाई होती है और दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है। उनका कहना है कि यदि हाईवे पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था हो जाए तो यात्रा अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक हो सकती है।


यात्रा में शामिल शिवभक्तों ने बताया कि कई स्थानों पर पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं और विश्राम स्थलों की भी कमी महसूस की जा रही है। उनका कहना है कि यात्रा के दौरान इन मूलभूत सुविधाओं का बेहतर प्रबंध होना आवश्यक है, ताकि लाखों श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

प्रशासन ने दावा किया था कि 25 जुलाई से पहले कांवड़ यात्रा से जुड़ी सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी। इनमें शौचालय, स्वास्थ्य शिविर, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और दिशा-सूचक संकेतकों जैसी आवश्यक सुविधाएं शामिल थीं। हालांकि कांवड़ पटरी पर अधिकांश व्यवस्थाएं संतोषजनक दिखाई दे रही हैं।

इसके बावजूद हाईवे से गुजरने वाले श्रद्धालुओं के लिए कई स्थानों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य बुनियादी सुविधाओं का अभाव देखा जा रहा है। यात्रा के चरम पर पहुंचने के कारण इन कमियों का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।


श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन के सामने हाईवे पर सुरक्षा और सुविधाओं को और मजबूत बनाने की चुनौती है। यदि प्रकाश व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य मूलभूत सुविधाओं में शीघ्र सुधार किया जाता है तो लाखों शिवभक्तों की यात्रा अधिक सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित ढंग से पूरी हो सकेगी।

