जसपुर में धान पंजीकरण को लेकर किसानों की अहम बैठक, अधिकारियों को सौंपा 10 सूत्रीय मांगपत्र

जसपुर में धान पंजीकरण को लेकर किसानों की अहम बैठक, अधिकारियों को सौंपा 10 सूत्रीय मांगपत्र

स्थान : जसपुर
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड के जनपद ऊधम सिंह नगर की जसपुर विधानसभा क्षेत्र में धान की फसल के पंजीकरण और खरीद व्यवस्था को लेकर क्षेत्रीय किसानों एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। कलियावाला रोड स्थित ब्लॉक कॉलोनी के एक रिसॉर्ट में आयोजित इस बैठक में विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में किसान पहुंचे और अपनी समस्याओं को अधिकारियों के समक्ष रखा।

बैठक में कृषि एवं खाद्य विभाग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया। किसानों ने धान खरीद प्रक्रिया के दौरान हर वर्ष आने वाली व्यावहारिक समस्याओं और तकनीकी बाधाओं पर विस्तार से चर्चा की तथा समय रहते उनका समाधान किए जाने की मांग उठाई।

किसानों ने कहा कि धान खरीद के समय पोर्टल बंद होने या तकनीकी खामियों के कारण उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने मांग की कि इस वर्ष धान खरीद के दौरान पोर्टल संबंधी किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो, ताकि सभी किसानों का धान बिना किसी बाधा के खरीदा जा सके।

बैठक में किसानों ने यह भी मांग रखी कि सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर ही धान की खरीद सुनिश्चित की जाए। साथ ही प्रत्येक क्रय केंद्र पर कम से कम 500 कुंतल धान की दैनिक तौल की व्यवस्था की जाए, जिससे किसानों को लंबा इंतजार न करना पड़े।

किसानों ने आगामी 1 अक्टूबर 2026 से सभी धान क्रय केंद्रों पर कांटे एवं खरीद व्यवस्था सुचारु रूप से शुरू किए जाने की मांग की। उनका कहना था कि खरीद प्रक्रिया समय पर शुरू होने से किसानों को अपनी उपज बेचने में सुविधा होगी और आर्थिक नुकसान से भी बचा जा सकेगा।

बैठक में बिना राजस्व ग्रामों के किसानों की समस्या भी प्रमुखता से उठाई गई। किसानों ने मांग की कि ऐसे किसानों का भी धान बिना फसल पंजीकरण के खरीदा जाए, ताकि किसी भी किसान को केवल तकनीकी कारणों से अपनी उपज बेचने से वंचित न होना पड़े।

बैठक के अंत में किसानों ने अपनी विभिन्न समस्याओं और सुझावों को शामिल करते हुए अधिकारियों को 10 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। किसानों ने मांग की कि उनकी सभी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाए, जिससे आगामी धान खरीद सत्र सुचारु रूप से संचालित हो सके और क्षेत्र के किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।