
स्थान : ज्योतिर्मठ
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड के चमोली जिले में ज्योतिर्मठ के हाथी पहाड़ पर स्लोप ट्रीटमेंट वायर के जाल में फंसे दुर्लभ हिमालयन तहर का नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क की टीम ने सफल रेस्क्यू किया है। मारवाड़ी-विष्णुप्रयाग के बीच स्थित हाथी पहाड़ की खड़ी चट्टानों पर करीब तीन घंटे तक चले चुनौतीपूर्ण अभियान के बाद वनकर्मियों ने वन्यजीव को सुरक्षित बाहर निकाला। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में चलाए गए इस रेस्क्यू अभियान में वन विभाग की टीम के साथ स्थानीय निवासी ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जानकारी के अनुसार, मारवाड़ी और विष्णुप्रयाग के बीच हाथी पहाड़ पर ढलान सुरक्षा के लिए लगाए गए ट्रीटमेंट वायर के जाल में एक हिमालयन तहर फंस गया था। जाल में फंसने के कारण वन्यजीव बाहर नहीं निकल पा रहा था। इसकी सूचना मिलने पर नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन ने तत्काल रेस्क्यू टीम को मौके पर भेजा। पहाड़ की खड़ी चट्टानों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण वन्यजीव तक पहुंचना टीम के लिए चुनौतीपूर्ण था।





सूचना मिलते ही वन दरोगा सरिता नेगी के नेतृत्व में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। रेस्क्यू अभियान में वन आरक्षी सीमा, चंद्रमोहन, वाहन चालक मनीष और स्थानीय निवासी कमलेश सिंह राणा ने सहयोग किया। टीम ने सबसे पहले खड़ी चट्टान पर फंसे वन्यजीव की स्थिति का जायजा लिया और उसे सुरक्षित निकालने की रणनीति तैयार की। इस दौरान वनकर्मियों को कठिन पहाड़ी परिस्थितियों में सावधानीपूर्वक अभियान चलाना पड़ा।


हाथी पहाड़ की खड़ी ढलान पर ट्रीटमेंट वायर में फंसे हिमालयन तहर को निकालना आसान नहीं था। जाल में फंसे वन्यजीव को नुकसान पहुंचाए बिना सुरक्षित मुक्त करना टीम की प्राथमिकता थी। वनकर्मियों ने सावधानी के साथ रेस्क्यू अभियान आगे बढ़ाया और करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद हिमालयन तहर को वायर के जाल से सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की।


हिमालयन तहर हिमालय के ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों में पाया जाने वाला वन्यजीव है। यह अपनी मजबूत शारीरिक बनावट और खड़ी चट्टानों पर आसानी से चढ़ने की क्षमता के लिए जाना जाता है। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में रहने वाला यह वन्यजीव प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में इसका सुरक्षित रेस्क्यू वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के रेंज अधिकारी आशीष जिरवाण ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में स्लोप ट्रीटमेंट के लिए लगाए गए वायर के जाल में वन्यजीवों के फंसने की घटनाएं वन विभाग के लिए चुनौती बन रही हैं। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों और दुर्गम परिस्थितियों के बीच इस प्रकार के रेस्क्यू अभियान चलाना आसान नहीं होता। खड़ी चट्टानों पर वन्यजीवों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए वनकर्मियों को काफी जोखिम उठाना पड़ता है।



रेंज अधिकारी ने वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ट्रीटमेंट वायर की संरचना की समीक्षा किए जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि पहाड़ी ढलानों की सुरक्षा के लिए लगाए जाने वाले वायर के जाल वन्यजीवों के लिए खतरा बन सकते हैं। इसलिए ऐसी संरचनाओं का वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से मूल्यांकन किया जाना जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

फिलहाल नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क की टीम द्वारा हिमालयन तहर का सफल रेस्क्यू किए जाने से एक वन्यजीव की जान बचाने में सफलता मिली है। वन दरोगा सरिता नेगी के नेतृत्व में वनकर्मियों और स्थानीय निवासी के सहयोग से चलाया गया यह अभियान चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में वन्यजीव संरक्षण का उदाहरण बना है। वहीं इस घटना ने पहाड़ी क्षेत्रों में ढलान सुरक्षा के लिए लगाई जाने वाली संरचनाओं और वन्यजीवों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को भी सामने ला दिया है।

