काशीपुर में हाईटेक साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़, AI तकनीक से की जा रही थीं हजारों कॉल

काशीपुर में हाईटेक साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़, AI तकनीक से की जा रही थीं हजारों कॉल

स्थान : काशीपुर
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने ऊधमसिंह नगर जिले के काशीपुर में संचालित एक हाईटेक डिजिटल कॉल सेंटर नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस नेटवर्क के जरिए क्लाउड आधारित डिजिटल एक्सचेंज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक की मदद से बड़े पैमाने पर ऑटोमेटेड कॉल की जा रही थीं। एसटीएफ की जांच में महज 21 दिनों के भीतर 45,453 आउटगोइंग कॉल किए जाने की पुष्टि हुई है। कार्रवाई के दौरान एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि उसका एक अन्य साथी फरार बताया जा रहा है।

आईजी एसटीएफ नीलेश आनंद भरणे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि काशीपुर में एनएस एंटरप्राइज नाम से संदिग्ध डिजिटल टेलीकॉम सेटअप संचालित किया जा रहा था। यह नेटवर्क पारंपरिक सिम बॉक्स की तर्ज पर काम करता था, लेकिन इसमें आधुनिक क्लाउड आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा था। आरोपियों द्वारा इंटरनेट और डिजिटल एक्सचेंज के माध्यम से एक साथ बड़ी संख्या में लोगों को कॉल की जा रही थीं। प्रारंभिक जांच में अवैध अंतरराष्ट्रीय कॉल रूटिंग और साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी गतिविधियों की आशंका सामने आई है।

एसटीएफ के मुताबिक इस डिजिटल नेटवर्क में एआई आधारित ऑटोमेटेड कॉलिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा था। ऐसी तकनीक में कंप्यूटर जनित आवाज के जरिए लोगों से बातचीत कराई जा सकती है। अधिकारियों को आशंका है कि इस प्रकार के सिस्टम का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट और फर्जी निवेश योजनाओं से जुड़ी साइबर ठगी में भी किया जा सकता है। पुलिस अब जांच कर रही है कि इस नेटवर्क से की गई कितनी कॉल धोखाधड़ी से संबंधित थीं और कितने लोग इसके शिकार हुए।

आईजी नीलेश आनंद भरणे ने बताया कि संदिग्ध डिजिटल एक्सचेंज के जरिए एसआईपी यानी सेशन इनिशिएशन प्रोटोकॉल कनेक्शन का इस्तेमाल किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में अंतरराष्ट्रीय कॉल के निर्धारित गेटवे को बाईपास किए जाने के संकेत मिले हैं। इसके जरिए विदेशी कॉल को स्थानीय कॉल की तरह प्रस्तुत करने की आशंका जताई गई है। इस तकनीक के माध्यम से बड़ी संख्या में स्वचालित कॉल करना संभव था, जिससे नेटवर्क की गतिविधियों का दायरा काफी व्यापक हो गया था।

एसटीएफ की साइबर क्राइम कुमाऊं यूनिट ने दूरसंचार विभाग (डीओटी) के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए संदिग्ध कॉल सेंटर पर छापेमारी की। इस दौरान कंप्यूटर सिस्टम, सर्वर से संबंधित उपकरण, मोबाइल फोन, राउटर, पेन ड्राइव और अन्य नेटवर्किंग डिवाइस बरामद किए गए। जांच टीम ने डिजिटल लॉग और तकनीकी साक्ष्यों को भी सुरक्षित किया है। अधिकारियों के अनुसार इन उपकरणों की जांच से नेटवर्क के संचालन और उससे जुड़े अन्य लोगों की जानकारी मिलने की उम्मीद है।

पुलिस ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के निवासी नईमुद्दीन को गिरफ्तार किया है। वहीं, नेटवर्क से जुड़े एक अन्य आरोपी की तलाश की जा रही है। एसटीएफ यह पता लगाने में जुटी है कि अवैध डिजिटल एक्सचेंज के संचालन में किन-किन लोगों की भूमिका थी और इसके तार अन्य राज्यों या विदेशों में सक्रिय साइबर अपराधियों से जुड़े हुए थे या नहीं। आरोपियों के डिजिटल संपर्कों और तकनीकी गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।

एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार काशीपुर में सामने आया यह मामला साइबर अपराध के बदलते स्वरूप की ओर संकेत करता है। पहले साइबर अपराधी सामान्य मोबाइल नंबरों और सिम बॉक्स के जरिए लोगों को निशाना बनाते थे, लेकिन अब इंटरनेट आधारित डिजिटल एक्सचेंज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल सामने आ रहा है। अधिकारियों ने इस कार्रवाई को उत्तराखंड में क्लाउड आधारित अवैध कॉलिंग नेटवर्क के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता बताया है।

फिलहाल एसटीएफ बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि नेटवर्क से की गई हजारों कॉल किन लोगों को भेजी गई थीं और इनमें कितनी कॉल साइबर ठगी से जुड़ी थीं। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अनजान नंबरों से आने वाली संदिग्ध कॉल, डिजिटल अरेस्ट की धमकियों और अधिक मुनाफे का लालच देने वाली निवेश योजनाओं से सावधान रहें। एसटीएफ का कहना है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।