
स्थान : हल्द्वानी
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाए जाने की मांग को लेकर हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में 18 अक्टूबर से चल रहा अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन लगातार जारी है। आंदोलन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से राज्य आंदोलनकारी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि पहुंचकर समर्थन दे रहे हैं। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी घोषित नहीं किया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

सोमवार को क्रमिक अनशन में नंदप्रयाग से पहुंचे 78 वर्षीय राज्य आंदोलनकारी गोपाल दत्त और कुमोड़ी गांव के दुर्गा सहित अन्य आंदोलनकारियों ने भाग लिया। आंदोलनकारियों ने कहा कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग दशकों पुरानी है, लेकिन अब तक इस पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को आमरण अनशन और व्यापक धरना-प्रदर्शन में भी बदला जा सकता है।



आंदोलनकारियों ने प्रदेश की प्रमुख राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियों पर गैरसैंण के मुद्दे की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि राजनीतिक दलों ने लंबे समय से स्थायी राजधानी के सवाल को जनता के बीच राजनीतिक मुद्दा बनाकर रखा है, लेकिन इसका स्थायी समाधान नहीं निकाला। उन्होंने कहा कि अब राज्य की जनता राजधानी के मुद्दे पर निर्णायक कदम चाहती है और आंदोलनकारी पीछे हटने वाले नहीं हैं।


पहाड़ी आर्मी के संस्थापक हरीश रावत ने बताया कि अब तक टिहरी से अनिल बहुगुणा, चौखुटिया से भुवन कठायत, गौचर से रमेश थपलियाल, रुद्रप्रयाग से सेवानिवृत्त इंजीनियर दयाल सिंह राणा, मासी से आनंद राम, चमोली से दुर्गा प्रसाद, गैरसैंण से नारायण सिंह बिष्ट और नंदप्रयाग से गोपाल दत्त सहित कई आंदोलनकारी हल्द्वानी पहुंचकर क्रमिक अनशन में भाग ले चुके हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ ही अन्य राज्यों में रहने वाले प्रवासी उत्तराखंडी भी आंदोलन को समर्थन देने पहुंच रहे हैं।


आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पूर्व आईएएस विनोद प्रसाद रतूड़ी ने बताया कि पहाड़ी आर्मी के संस्थापक एवं समाजसेवी हरीश रावत मंगलवार से क्रमिक अनशन में बैठेंगे। उन्होंने कहा कि पहाड़ी आर्मी लंबे समय से पहाड़ के अस्तित्व, अस्मिता और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही है। गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के आंदोलन में संगठन का पूरा सहयोग मिल रहा है।
पूर्व आईएएस रतूड़ी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी स्थायी राजधानी का प्रश्न अधूरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि पहाड़ के खेतों, किसानों, गांवों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाना आवश्यक है। राज्य आंदोलनकारियों और शहीदों ने जिस उत्तराखंड की कल्पना की थी, उसके सपनों को अब और अधूरा नहीं रखा जाना चाहिए।




आंदोलनकारियों ने घोषणा की कि 27 अक्टूबर को गैरसैंण के भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र के आयोजन के समानांतर हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में भी सांकेतिक विधानसभा सत्र आयोजित किया जाएगा। इस दौरान मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, विधानसभा सचिव और प्रदेश के 70 विधायकों की प्रतीकात्मक भूमिकाएं निर्धारित कर गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया जाएगा। आंदोलनकारियों ने इसे सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने का लोकतांत्रिक प्रयास बताया।

इस दौरान पहाड़ी आर्मी के जिलाध्यक्ष फौजी राजेंद्र कांडपाल, प्रेमा मेर, कविता जीना, डॉ. आशुतोष पंत, फौजी भुवन पांडे, नीमा भट्ट, अंजू पांडे, ललित मोहन सिंह जीना, सुनील सिंह, विजय जोशी, संजय बिष्ट, कार्तिक उपाध्याय, रेखा बिष्ट, मोहन पाटनी, मोहन कांडपाल, कमलेश खंडूरी, संजय वर्मा, नवीन टम्टा, मनोज सिंह, करण सिंह बिष्ट, संजय रौतेला और कमल रावत सहित दर्जनों आंदोलनकारी मौजूद रहे। सभी ने प्रदेश के युवाओं, महिलाओं, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से गैरसैंण स्थायी राजधानी आंदोलन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की।

