शिवालिक नगर में सीलिंग के डर से व्यापारी चिंतित, सरकार से राहत की मांग

शिवालिक नगर में सीलिंग के डर से व्यापारी चिंतित, सरकार से राहत की मांग

स्थान : हरिद्वार
ब्यूरो रिपोर्ट

शिवालिक नगर बाजार में सुप्रीम कोर्ट के सीलिंग संबंधी आदेश के बाद व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। दीपावली और सर्दियों के कारोबारी सीजन से पहले दुकानदारों को दुकानें बंद होने और कारोबार प्रभावित होने का डर सता रहा है। इसको लेकर शिवालिक नगर व्यापार मंडल ने प्रदेश सरकार और स्थानीय विधायक से राहत दिलाने की मांग की है।

व्यापारियों का कहना है कि सिडकुल के शिवालिक नगर आवासीय क्षेत्र में लंबे समय से छोटी-बड़ी दुकानें संचालित हो रही हैं। उनके अनुसार, यह क्षेत्र करीब 50 से 60 साल पुराना है और यहां के कारोबार से सैकड़ों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। ऐसे में सीलिंग या तोड़फोड़ की कार्रवाई होने पर कई परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है।

व्यापारियों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि दीपावली और सर्दियों के सीजन को देखते हुए कई दुकानदारों ने लाखों रुपये का माल खरीदकर स्टॉक किया है। उनका कहना है कि यदि इस समय दुकानें बंद करनी पड़ीं, तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

इसके अलावा, कई कारोबारियों ने अपने व्यवसाय के लिए बैंकों से कर्ज भी लिया हुआ है। व्यापारियों के मुताबिक, संभावित कार्रवाई का असर केवल दुकान मालिकों पर ही नहीं, बल्कि वहां काम करने वाले कर्मचारियों और उनके परिवारों पर भी पड़ सकता है।

मध्य प्रदेश की तर्ज पर राहत देने की मांग

शिवालिक नगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष विभाष सिन्हा ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने मास्टर प्लान के तहत आवासीय क्षेत्रों में संचालित दुकानों को मिक्स्ड लैंड उपयोग में शामिल कर नियमित करने का रास्ता अपनाया है। उन्होंने उत्तराखंड सरकार से भी इसी तरह का विकल्प तलाशने की मांग की।

विभाष सिन्हा ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्थानीय विधायक को व्यापारियों की समस्या पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने मांग की कि शिवालिक नगर की दुकानों के संबंध में ऐसा समाधान निकाला जाए, जिससे कारोबारियों की आजीविका सुरक्षित रह सके और नियमों के अनुरूप व्यवस्था बनाई जा सके।

व्यापार मंडल का कहना है कि व्यापारियों ने वर्षों से यहां दुकानें संचालित कर अपने परिवारों का पालन-पोषण किया है। ऐसे में किसी भी कार्रवाई से पहले उनकी समस्याओं और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

फिलहाल व्यापारी सरकार के रुख का इंतजार कर रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रदेश सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधि इस मांग पर क्या कदम उठाते हैं और व्यापारियों को राहत देने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था सामने आती है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के दायरे और उसके अनुपालन की स्थिति के बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध होने पर ही आगे की कार्रवाई स्पष्ट हो सकेगी।