
स्थान : हरिद्वार
ब्यरो रिपोर्ट

हरिद्वार से उत्तर प्रदेश के कई जिलों तक पानी पहुंचाने वाली उत्तरी गंग नहर को वार्षिक रखरखाव और मरम्मत कार्यों के लिए बंद कर दिया गया है। मंगलवार मध्यरात्रि भीमगौड़ा बैराज से नहर में पानी की आपूर्ति रोक दी गई। नहर बंद होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कृषि क्षेत्रों में सिंचाई और दिल्ली-एनसीआर की पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है।

हर साल दशहरे के बाद छोटी दीपावली तक उत्तरी गंग नहर को सफाई और मरम्मत के लिए बंद किया जाता है। इस अवधि में नहर के भीतर जमा गाद और अन्य अवरोधों को हटाने के साथ आवश्यक रखरखाव कार्य किए जाते हैं, ताकि नहर के माध्यम से पानी की आपूर्ति सुचारु रूप से संचालित हो सके।




नहर बंदी के दौरान विभाग की ओर से विभिन्न स्थानों पर मरम्मत कार्य कराए जाएंगे। इसके तहत नहर के चैनल गेटों को दुरुस्त किया जाएगा और अन्य तकनीकी खामियों को दूर किया जाएगा। विभाग का प्रयास है कि निर्धारित अवधि में सभी आवश्यक कार्य पूरे कर नहर में पानी की आपूर्ति दोबारा शुरू की जा सके।


आगामी अर्धकुंभ को देखते हुए गंग नहर के किनारे बनाए जा रहे घाटों के निर्माण कार्यों को भी इस दौरान गति दी जाएगी। हरिद्वार में श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक आयोजनों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए घाटों का निर्माण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के एसडीओ भारत भूषण ने बताया कि नहर बंद होने के बावजूद हरकी पैड़ी पर श्रद्धालुओं के स्नान के लिए पर्याप्त पानी छोड़ा गया है। इससे हरकी पैड़ी पर आने वाले श्रद्धालुओं को स्नान के दौरान पानी की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

नहर बंद होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उन क्षेत्रों में सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है, जहां कृषि कार्यों के लिए गंग नहर के पानी पर निर्भरता है। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर की पेयजल आपूर्ति पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, आपूर्ति पर वास्तविक प्रभाव संबंधित व्यवस्थाओं और वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर करेगा।




विभाग के अनुसार, रखरखाव और मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद 7 नवंबर की रात उत्तरी गंग नहर में दोबारा पानी छोड़ने की योजना है। इसके बाद नहर के माध्यम से पानी की आपूर्ति फिर से शुरू हो सकेगी।

गंग नहर की वार्षिक बंदी के दौरान जहां एक ओर आवश्यक मरम्मत और सफाई कार्य पूरे किए जाएंगे, वहीं दूसरी ओर आगामी अर्धकुंभ के मद्देनजर घाट निर्माण को भी आगे बढ़ाया जाएगा। विभाग की प्राथमिकता निर्धारित समय में कार्य पूरा कर नहर में जल प्रवाह बहाल करना है, ताकि सिंचाई और पेयजल आपूर्ति सामान्य हो सके।
