
स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले दल-बदल की चर्चाओं ने प्रदेश की सियासत को गरमा दिया है। रामशरण नौटियाल की कांग्रेस में वापसी के बाद अब भाजपा और कांग्रेस के बीच नेताओं के पाला बदलने को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। दोनों ही दल एक-दूसरे के नेताओं के संपर्क में होने के दावे कर रहे हैं।

दरअसल, रामशरण नौटियाल के कांग्रेस में शामिल होने के बाद कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने दावा किया था कि भाजपा का एक और वरिष्ठ नेता कांग्रेस के संपर्क में है। इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गईं और भाजपा की ओर से भी इस पर प्रतिक्रिया सामने आई है।



भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने हरक सिंह रावत के दावे पर पलटवार करते हुए कहा कि चुनावी वर्ष में दलों के बीच नेताओं का आना-जाना लगा रहता है। उन्होंने कहा कि दूसरे दलों से भी कई लोग भाजपा में आएंगे, जबकि कुछ महत्वाकांक्षी नेता भाजपा छोड़कर जा सकते हैं।


भट्ट ने कहा कि जो व्यक्ति पार्टी छोड़कर चला जाता है, उस पर ज्यादा टिप्पणी करने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, चुनाव से पहले इस तरह की राजनीतिक गतिविधियां सामान्य हैं और केवल किसी नेता के पार्टी छोड़ने से भाजपा पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ने वाला है।


भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए दावा किया कि कांग्रेस का बचा हुआ कुनबा भी टूटेगा और वहां से कई नेता भाजपा में शामिल होंगे। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में कांग्रेस के कुछ नेताओं के भाजपा में आने की संभावनाएं बन सकती हैं।
महेंद्र भट्ट ने यह भी कहा कि भाजपा में शामिल होने के इच्छुक नेताओं को लेकर पार्टी स्तर पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। पार्टी यह तय करेगी कि किन लोगों को अपने साथ जोड़ना है और किन्हें नहीं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जल्द ही तस्वीर साफ हो जाएगी।



भट्ट के इस बयान के बाद उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं। रामशरण नौटियाल की कांग्रेस में वापसी के बाद अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में कौन-कौन से नेता दल बदलते हैं।
हालांकि, भाजपा के वरिष्ठ नेता के कांग्रेस के संपर्क में होने और कांग्रेस नेताओं के भाजपा में शामिल होने को लेकर अभी राजनीतिक दावे ही सामने आए हैं। आने वाले दिनों में इन दावों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल, 2027 के चुनाव से पहले दोनों प्रमुख दलों के बीच बयानबाजी और राजनीतिक जोड़-तोड़ की चर्चाएं तेज होती दिखाई दे रही हैं।
