अल्मोड़ा में विश्व प्रसिद्ध दशहरा महोत्सव की धूम, तीन दर्जन से अधिक राक्षसों के पुतलों का हुआ दहन

अल्मोड़ा में विश्व प्रसिद्ध दशहरा महोत्सव की धूम, तीन दर्जन से अधिक राक्षसों के पुतलों का हुआ दहन

स्थान: अल्मोड़ा
ब्यूरो रिपोर्ट

सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में विश्व प्रसिद्ध दशहरा महोत्सव हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया। अपनी अनूठी कलात्मकता और पुतलों की विशेष परंपरा के लिए देश-दुनिया में पहचान रखने वाले इस महोत्सव का शुभारंभ केंद्रीय सड़क परिवहन राज्य मंत्री अजय टम्टा ने किया। दशहरा महोत्सव को देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग पहुंचे और पूरे शहर में उत्सव का माहौल देखने को मिला।

अल्मोड़ा का दशहरा महोत्सव अपनी विशिष्ट परंपरा के लिए जाना जाता है। यहां दशहरे पर केवल रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का ही दहन नहीं किया जाता, बल्कि रामायण के युद्ध में मारे गए रावण के पक्ष के अन्य राक्षसों के पुतले भी तैयार किए जाते हैं। यही विशेषता अल्मोड़ा के दशहरे को अन्य स्थानों पर होने वाले आयोजनों से अलग पहचान दिलाती है।

महोत्सव के लिए कलाकारों द्वारा राक्षसों के पुतलों को आकर्षक और कलात्मक स्वरूप दिया जाता है। इस दौरान ताड़का, सुबाहु, खर, दूषण, अतिकाय, मारीच, देवांतक, नरांतक और अक्षय कुमार सहित तीन दर्जन से अधिक पुतलों का निर्माण किया जाता है। इन पुतलों की बनावट, आकार और कलात्मक सजावट लोगों के आकर्षण का केंद्र रहती है।

अल्मोड़ा में पुतलों के निर्माण की परंपरा स्थानीय कलाकारों की मेहनत और हुनर को प्रदर्शित करती है। महीनों की तैयारी और रचनात्मकता के बाद तैयार किए जाने वाले इन पुतलों को देखने के लिए लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं। दशहरा महोत्सव के माध्यम से शहर की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कला को भी पहचान मिलती है।

महोत्सव के दौरान सभी पुतलों को नगर भ्रमण कराया जाता है। करीब दो किलोमीटर की यात्रा के बाद पुतलों को स्टेडियम पहुंचाया जाता है, जहां उनका दहन किया जाता है। इस दौरान सड़कों के किनारे बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होकर पुतलों की भव्यता का आनंद लेते हैं। नगर भ्रमण के दौरान पूरा वातावरण उत्सवमय नजर आता है।

दशहरा महोत्सव में स्थानीय लोगों के साथ-साथ देश-दुनिया से आने वाले पर्यटक भी हिस्सा लेते हैं। हजारों दर्शकों की मौजूदगी इस आयोजन की लोकप्रियता को दर्शाती है। लोग परिवार और मित्रों के साथ पहुंचकर इस अनूठे दशहरा महोत्सव का आनंद लेते हैं और अल्मोड़ा की सांस्कृतिक परंपरा से रूबरू होते हैं।

केंद्रीय सड़क परिवहन राज्य मंत्री अजय टम्टा द्वारा महोत्सव का शुभारंभ किए जाने के साथ आयोजन की शुरुआत उत्साहपूर्ण माहौल में हुई। दशहरा महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह अल्मोड़ा की ऐतिहासिक पहचान, स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा और सामूहिक सहभागिता का भी परिचायक है।

कुल मिलाकर, अल्मोड़ा का विश्व प्रसिद्ध दशहरा महोत्सव अपनी अनूठी परंपरा, तीन दर्जन से अधिक पुतलों और भव्य नगर भ्रमण के चलते आकर्षण का केंद्र बना रहा। रावण के परिवार और उसके सहयोगी राक्षसों के पुतलों का दहन इस आयोजन को विशेष पहचान देता है। यह महोत्सव हर साल बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देने के साथ उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत बनाए रखता है।