
स्थान: हल्द्वानी
रिपोर्टर: पंकज सक्सेना

शहर की ऐतिहासिक प्राचीन रामलीला में दशहरे के अवसर पर रावण दहन के साथ बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया। इस दौरान रामलीला मैदान में हजारों की संख्या में दर्शक मौजूद रहे। लोगों ने भगवान राम की लीला का आनंद लिया और रावण दहन के साक्षी बने। पूरे आयोजन के दौरान उत्साह और उल्लास का माहौल देखने को मिला।

हल्द्वानी की प्राचीन रामलीला का इतिहास करीब 115 साल पुराना है। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। दशहरे के अवसर पर रामलीला मैदान में लोगों की भारी भीड़ जुटी और शहर के साथ आसपास के क्षेत्रों से भी दर्शक इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बने।




इस अवसर पर राज्यसभा सांसद दिनेश आर्य, हल्द्वानी के मेयर गजराज बिष्ट, भाजपा के जिला अध्यक्ष प्रताप बिष्ट और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ललित जोशी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। जनप्रतिनिधियों और नेताओं ने लोगों को दशहरे की शुभकामनाएं देते हुए पर्व के महत्व पर प्रकाश डाला।


कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि दशहरा हमें बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है। भगवान राम का जीवन आदर्श, मर्यादा, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में इन आदर्शों को अपनाना चाहिए।



इस बार रामलीला में रावण का पुतला विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। रिमोट से संचालित पुतले को देखने के लिए दर्शकों में खासा उत्साह दिखाई दिया। पुतले के दहन को देखने के लिए लोग काफी देर तक मैदान में डटे रहे। आयोजन में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

रावण दहन के दौरान की गई भव्य आतिशबाजी ने कार्यक्रम की रौनक बढ़ा दी। आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी और आतिशबाजी के नजारों को देखकर दर्शक उत्साहित नजर आए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने इस आयोजन का आनंद लिया। रामलीला और आतिशबाजी के साथ पूरा वातावरण उत्सवमय बना रहा।




वक्ताओं ने कहा कि सनातन संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाना हम सभी का कर्तव्य है। भगवान राम के आदर्शों पर चलते हुए समाज में सद्भाव, भाईचारे और नैतिक मूल्यों को मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे बुराई का साथ छोड़कर अच्छाई, सत्य और न्याय के मार्ग पर चलें तथा अपनी सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएं।

कुल मिलाकर, हल्द्वानी की 115 साल पुरानी प्राचीन रामलीला में रावण दहन का आयोजन आस्था, परंपरा और उत्साह का प्रतीक बना। हजारों दर्शकों की मौजूदगी और भव्य आतिशबाजी ने दशहरे के उत्सव को यादगार बना दिया। आयोजन ने एक बार फिर संदेश दिया कि सत्य और अच्छाई की राह पर चलकर ही समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है

