अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर फिर गरमाई सियासत, कांग्रेस ने सरकार को घेरा

अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर फिर गरमाई सियासत, कांग्रेस ने सरकार को घेरा

स्थान : काशीपुर
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर प्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। भाजपा नेता दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद कांग्रेस ने इस मामले को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने प्रदर्शन के दौरान भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए मामले में कथित VIP/VVIP की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग दोहराई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस प्रकरण से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब देने के बजाय आरोपित राजनीतिक व्यक्तियों को बचाने का प्रयास कर रही है।

अंकिता भंडारी के माता-पिता द्वारा दिल्ली में न्याय की मांग को लेकर धरना दिए जाने और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं राहुल गांधी व प्रियंका गांधी की उनसे मुलाकात के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस का कहना है कि अंकिता को न्याय दिलाने के लिए मामले की जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए तथा कथित VIP की भूमिका से जुड़े सवालों का भी जवाब सामने आना चाहिए।

दिल्ली में धरने के बाद उत्तराखंड में तेज हुआ विरोध

अंकिता के माता-पिता ने दिल्ली में धरना देकर मांग उठाई कि CBI जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति पर रोक लगाई जाए। इस दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, सुप्रिया श्रीनेत और पवन खेड़ा समेत कांग्रेस के कई नेता उनके समर्थन में पहुंचे। 15 अक्टूबर की सुबह दिल्ली पुलिस ने धरना दे रहे अंकिता के माता-पिता और कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया।

दिल्ली में हुए घटनाक्रम के बाद उत्तराखंड में भी कांग्रेस ने प्रदर्शन तेज कर दिए। देहरादून समेत प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में पार्टी कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय सुनिश्चित करना और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच कराना जरूरी है।

कथित VIP की भूमिका की जांच पर अड़ी कांग्रेस

कांग्रेस शुरुआत से ही अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित VIP/VVIP की भूमिका की जांच की मांग उठाती रही है। पार्टी की मांग है कि मामले की CBI जांच निष्पक्ष तरीके से हो और इसकी निगरानी सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के न्यायाधीश से कराई जाए। कांग्रेस का आरोप है कि रिसॉर्ट में कथित VIP के आने से जुड़े सवालों का अब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। हालांकि, इस संबंध में लगाए गए आरोपों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही होनी चाहिए।

दिसंबर 2025 में पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर से जुड़ा कथित ऑडियो-वीडियो सामने आने के बाद यह मुद्दा फिर सुर्खियों में आया था। इस घटनाक्रम के बाद कथित VIP की पहचान और भूमिका को लेकर नए सिरे से सवाल उठे। अंकिता के पिता ने भी CBI जांच की मांग दोहराई, जिसे कांग्रेस ने समर्थन दिया।

2022 से जारी है न्याय की मांग

गौरतलब है कि अंकिता भंडारी की हत्या सितंबर 2022 में हुई थी और 24 सितंबर को उसका शव बरामद किया गया था। घटना के बाद पूरे उत्तराखंड में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। दिसंबर 2022 में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। इसके बाद मार्च 2023 में कोटद्वार की अदालत में मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई। 30 मई 2025 को इस मामले के तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

इसके बावजूद कथित VIP की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों के चलते कांग्रेस CBI जांच की मांग करती रही। पार्टी नेताओं ने समय-समय पर ज्ञापन देकर मामले की विस्तृत जांच कराने की मांग उठाई। फरवरी 2026 में सरकार की ओर से CBI जांच की सिफारिश किए जाने के बाद जांच शुरू होने की बात सामने आई।

अब दुष्यंत गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति के बाद यह मामला फिर राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। कांग्रेस का कहना है कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए कथित VIP/VVIP की भूमिका समेत सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है। वहीं, इस प्रकरण में लगाए जा रहे राजनीतिक आरोपों पर अंतिम स्थिति जांच के निष्कर्षों से ही स्पष्ट होगी।