
स्थान : चंपावत
ब्यूरो रिपोर्ट

कांग्रेस के जिला अध्यक्ष चिराग फर्त्याल ने उत्तराखंड में पशुपालकों की समस्याओं को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में पशुपालक दिन-रात मेहनत करने के बावजूद दूध का उचित मूल्य नहीं मिलने से परेशान हैं। चिराग फर्त्याल ने चंपावत जिले के दुग्ध उत्पादकों की समस्याओं का उल्लेख करते हुए राज्य सरकार से दूध के खरीद मूल्य में वृद्धि करने की मांग की।

चिराग फर्त्याल ने कहा कि चंपावत जिले में दुग्ध संघ के माध्यम से पशुपालकों को दूध का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। उनके मुताबिक, जिले के कई युवाओं ने लाखों रुपये का बैंक ऋण लेकर डेयरी व्यवसाय शुरू किया है, लेकिन दूध की कम कीमत और बढ़ती लागत के कारण उनका व्यवसाय घाटे में जा रहा है। स्थिति यह है कि कुछ पशुपालकों के लिए बैंक की किस्त चुकाना भी मुश्किल हो रहा है।



कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने कहा कि पशु आहार और पशुओं की दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी से पशुपालकों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है, जबकि दूध के दाम में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की अनदेखी के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में कई लोग पशुपालन का व्यवसाय छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।


उन्होंने कहा कि चंपावत जिले के पर्वतीय क्षेत्रों में पशुपालन ग्रामीणों की आजीविका का एक प्रमुख आधार है। ऐसे में दूध का उचित मूल्य नहीं मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वरोजगार पर असर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से पशुपालकों की समस्याओं को गंभीरता से लेने की अपील की।


चिराग फर्त्याल ने हिमाचल प्रदेश और केरल में दूध के खरीद मूल्य का उदाहरण देते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में गाय के दूध के लिए 61 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध के लिए 71 रुपये प्रति लीटर दिए जाने का दावा किया जाता है। वहीं, उन्होंने केरल में पशुपालकों को 103 रुपये प्रति लीटर तक दूध का दाम मिलने की बात कही।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पशुपालकों को भी उनकी मेहनत और उत्पादन लागत के अनुरूप उचित मूल्य मिलना चाहिए। हालांकि, हिमाचल प्रदेश और केरल में बताए गए दूध के दामों की दरें और उनकी लागू होने की शर्तें संबंधित सरकारी स्रोतों से सत्यापित किया जाना जरूरी है।



कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने कहा कि चंपावत जिले के पशुपालकों को दूध के दाम बढ़ाने की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करना पड़ रहा है, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मांग की कि पशुपालकों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर दूध का खरीद मूल्य बढ़ाया जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पशुपालकों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो कांग्रेस उनके साथ मिलकर आंदोलन करेगी। चिराग फर्त्याल ने कहा कि पार्टी पशुपालकों के हितों से जुड़े मुद्दों को उठाती रहेगी।
चिराग फर्त्याल ने प्रदेश में कर्मचारियों के धरना-प्रदर्शन का मुद्दा उठाते हुए भी राज्य सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न वर्गों के लोग अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का उचित समाधान नहीं हो रहा है। उन्होंने भाजपा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसका राजनीतिक असर आगामी विधानसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर पशुपालन को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर पशुपालक दूध का उचित मूल्य नहीं मिलने और बढ़ती लागत से परेशान हैं। कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने सरकार से पर्वतीय क्षेत्रों के पशुपालकों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए ठोस कदम उठाने की मांग की।

