
स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा व्यवस्था में किए गए बदलाव के बाद अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों के सामने मिड डे मील का संकट खड़ा हो गया है। प्रदेश सरकार ने मदरसा बोर्ड को भंग कर अल्पसंख्यक बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से नई व्यवस्था लागू की थी, लेकिन इस बदलाव के बाद कई मदरसों में बच्चों को मिलने वाली भोजन सुविधा प्रभावित हो गई है।

प्रदेश में पूर्व में पंजीकृत 452 मदरसों में से बड़ी संख्या में संस्थान नई मान्यता प्रक्रिया और अन्य कारणों से प्रभावित हुए हैं। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इनमें 227 मदरसे स्वयं बंद हो चुके हैं, जबकि 19 मदरसों को सील किया गया है। शेष संस्थानों में भी मिड डे मील और पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता को लेकर समस्याएं बनी हुई हैं।



जानकारी के अनुसार, पहले मदरसा शिक्षा बोर्ड से पंजीकृत पात्र मदरसों में शिक्षा विभाग की ओर से मिड डे मील की सुविधा उपलब्ध कराई जाती थी। लेकिन एक जुलाई 2026 से मदरसा बोर्ड के स्थान पर उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की व्यवस्था लागू होने के बाद भोजन योजना के संचालन में प्रशासनिक अड़चनें सामने आई हैं।

नई व्यवस्था के तहत मदरसों को विद्यालयी शिक्षा विभाग से संबद्धता और अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त करनी है। मान्यता प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण कई संस्थानों में मिड डे मील योजना का लाभ बच्चों तक नहीं पहुंच पा रहा है। इससे मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों की भोजन व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है।



मिड डे मील की सुविधा प्रभावित होने से अभिभावकों में भी नाराजगी देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि प्रशासनिक बदलाव और विभागीय प्रक्रियाओं का असर बच्चों की बुनियादी सुविधाओं पर नहीं पड़ना चाहिए। बच्चों को शिक्षा के साथ पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना भी आवश्यक है।
इस पूरे मामले में उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने कहा कि मिड डे मील बच्चों का अधिकार है। उन्होंने कहा कि मदरसा का अर्थ भी विद्यालय होता है और जिस प्रकार अन्य विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है, उसी प्रकार मदरसों में भी बच्चों को भोजन देने की परंपरा रही है।



शादाब शम्स ने बताया कि वर्तमान में मदरसों के पंजीकरण और मान्यता की प्रक्रिया चल रही है। उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा परिषद से संबंधित प्रक्रिया पूरी होने और अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता मिलने के बाद पात्र संस्थानों में मिड डे मील की सुविधा शुरू हो सकेगी। उन्होंने शिक्षा विभाग से इस प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं करने की अपील की।
वहीं, मान्यता प्रक्रिया को लेकर भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। एक अक्टूबर तक प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक 198 संस्थानों ने मान्यता के लिए आवेदन किया था, जिनमें 60 को स्वीकृति मिली थी और 138 आवेदन लंबित थे। ऐसे में मदरसों के संचालन और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
फिलहाल उत्तराखंड में मदरसों के बच्चों को मिड डे मील का लाभ कब तक नियमित रूप से मिल पाएगा, यह बड़ा सवाल बना हुआ है। वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स ने शिक्षा विभाग से जल्द कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि मान्यता और पंजीकरण की औपचारिकताओं के कारण बच्चों को पौष्टिक भोजन जैसी महत्वपूर्ण सुविधा से वंचित न रहना पड़े। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस समस्या के समाधान के लिए कितनी जल्दी ठोस कदम उठाता है।

