MBBS फर्जी प्रमाणपत्र मामले में कांग्रेस ने उठाए सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग

MBBS फर्जी प्रमाणपत्र मामले में कांग्रेस ने उठाए सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग

स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड में फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए एमबीबीएस में दाखिला लेने के मामले को लेकर कांग्रेस ने जांच का दायरा बढ़ाने की मांग की है। कांग्रेस के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने प्रेस वार्ता कर आशंका जताई कि मामला कुछ अभ्यर्थियों तक सीमित न होकर संगठित गिरोह से जुड़ा हो सकता है। उन्होंने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय अथवा स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।

धस्माना ने कहा कि मेडिकल दाखिलों में फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल के जो मामले सामने आए हैं, उनकी तह तक जाना जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि यदि संगठित तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार कर मेडिकल सीट हासिल कराई गई हैं तो इसके नेटवर्क, बिचौलियों और प्रमाणपत्र जारी करने या सत्यापन से जुड़े लोगों की भूमिका की भी गहन जांच होनी चाहिए।

मामले में पुलिस की एसआईटी पहले ही जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार फर्जी स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्रों के आधार पर एमबीबीएस सीट दिलाने के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक जांच में एक सीट के लिए करीब 45 लाख रुपये तक का सौदा किए जाने का आरोप सामने आया है। अन्य संदिग्ध व्यक्तियों और वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि जांच केवल स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, स्थायी निवास सहित दाखिले में इस्तेमाल होने वाली सभी संबंधित श्रेणियों के प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया जाना चाहिए, ताकि वास्तविक पात्र अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित न हों।

राज्य सरकार ने भी जांच का दायरा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश के बाद सभी आरक्षित श्रेणियों के प्रमाणपत्रों की जांच की जा रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अब तक आठ अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र अथवा दाखिले निरस्त किए जा चुके हैं और करीब 350 अभ्यर्थियों के दस्तावेज जांच के दायरे में बताए गए हैं।

धस्माना ने कहा कि इस तरह के मामलों का सीधा असर उन विद्यार्थियों पर पड़ता है जो वर्षों की मेहनत के बाद मेडिकल प्रवेश परीक्षा और काउंसलिंग में भाग लेते हैं। उन्होंने कहा कि यदि फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए किसी अपात्र व्यक्ति को सीट मिलती है तो इससे पात्र और मेधावी अभ्यर्थी का अवसर छिन सकता है।

उन्होंने प्रमाणपत्र जारी करने और सत्यापन की प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि जांच में यह भी सामने आना चाहिए कि कथित फर्जी दस्तावेज किस स्तर पर तैयार हुए और सत्यापन व्यवस्था में वे कैसे स्वीकार किए गए। पुलिस और प्रशासन की जांच भी अब दस्तावेज तैयार करने वाले नेटवर्क तथा संबंधित अधिकारियों या कर्मचारियों की संभावित भूमिका की ओर बढ़ रही है।

सूर्यकांत धस्माना ने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार को मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच सुनिश्चित करनी चाहिए। उनका दावा था कि यदि युवाओं को लगेगा कि उनके भविष्य और अधिकारों के साथ खिलवाड़ हो रहा है तो प्रदेश में विरोध बढ़ सकता है। उन्होंने सरकार से जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक करने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

फिलहाल एसआईटी फर्जी प्रमाणपत्रों, अभ्यर्थियों के दस्तावेजों, बिचौलियों और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है। राज्य सरकार ने भी सभी संबंधित श्रेणियों के दस्तावेजों की दोबारा पड़ताल के निर्देश दिए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि फर्जीवाड़े का दायरा कितना व्यापक था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।