
स्थान : चमोली
रिपोर्टर : विनोद पांडे

मां नंदा जात यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यात्रा व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए उत्तराखंड पुलिस के जवान दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर लगातार मुस्तैद रहे। कठिन चढ़ाइयों, संकरे रास्तों और विषम मौसम के बीच पुलिसकर्मियों ने श्रद्धालुओं की सहायता के साथ यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था संभाली। पांच सितंबर से शुरू हुई बड़ी जात यात्रा में पुलिस और एसडीआरएफ के जवान देव डोलियों के साथ भी तैनात रहे।
मां नंदा की कैलाश यात्रा आस्था और श्रद्धा के साथ बेहद चुनौतीपूर्ण हिमालयी यात्रा भी है। यात्रा मार्ग के कई हिस्से निर्जन और दुर्गम हैं, जहां सामान्य पैदल आवागमन भी आसान नहीं है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम, फिसलन और कठिन चढ़ाई-उतराई को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दी।



यात्रा के दौरान कई ऐसे क्षेत्र भी सामने आए, जहां मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं था। ऐसे स्थानों पर पुलिसकर्मियों के बीच संपर्क बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी चमोली पुलिस की दूरसंचार टीम ने संभाली। दूरसंचार के जवानों ने तकनीकी संसाधनों के माध्यम से दुर्गम क्षेत्रों में भी संचार व्यवस्था बनाए रखी।

महत्वपूर्ण पड़ावों और संवेदनशील स्थानों पर वायरलेस एंटीना स्थापित किए गए, जबकि यात्रा ड्यूटी में तैनात जवानों को वायरलेस सेट उपलब्ध कराए गए। इससे मोबाइल नेटवर्क नहीं होने के बावजूद पुलिस टीमें एक-दूसरे से संपर्क में बनी रहीं और आवश्यक सूचनाओं का तत्काल आदान-प्रदान होता रहा।



वायरलेस नेटवर्क की मदद से यात्रा मार्ग की स्थिति, श्रद्धालुओं की आवाजाही और किसी भी आपात परिस्थिति से जुड़ी सूचनाएं संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई गईं। इससे विभिन्न स्थानों पर तैनात सुरक्षा टीमों के बीच समन्वय बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर तत्काल सहायता भेजने में मदद मिली।

चमोली पुलिस ने यात्रा की सुरक्षा के लिए थराली क्षेत्र के मार्ग को एक जोन और चार सेक्टरों में बांटा था। पुलिस, एसडीआरएफ, फायर सर्विस, आईआरबी और दूरसंचार टीमों को अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया गया। अधिकारियों ने जवानों को मौसम और यात्रा मार्ग की स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए थे।



जमीन पर पुलिस जवानों की तैनाती के साथ यात्रा मार्ग की आसमान से भी निगरानी की गई। ड्रोन कैमरों के माध्यम से विभिन्न हिस्सों की स्थिति पर नजर रखी गई, जिससे भीड़, यात्रा मार्ग और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी में पुलिस को सहायता मिली।

दुर्गम रास्तों पर पुलिसकर्मियों ने श्रद्धालुओं को कठिन चढ़ाई और उतराई वाले स्थानों से सुरक्षित निकालने में भी सहयोग किया। यात्रा मार्ग पर सुरक्षा के साथ जरूरतमंद यात्रियों की सहायता और भीड़ प्रबंधन की जिम्मेदारी भी जवानों ने संभाली। चमोली पुलिस के अनुसार श्रद्धालुओं की सुरक्षित यात्रा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रही।

पुलिस प्रशासन का कहना है कि आधुनिक तकनीक और मैदानी स्तर पर जवानों की तैनाती के संयोजन से दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में यात्रा व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाए रखने में मदद मिली। मोबाइल नेटवर्क से दूर इलाकों में वायरलेस संचार और ड्रोन निगरानी ने मां नंदा जात यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

