
स्थान : रानीखेत
रिपोर्टर : संजय जोशी

मां नंदा-सुनंदा सेवा समिति के तत्वावधान में नंदा देवी मंदिर परिसर में लगातार चौथे वर्ष महिलाओं की पारंपरिक झोड़ा प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में नारी शक्ति रानीखेत ने प्रथम, शिव मंदिर मातृ शक्ति समूह ने द्वितीय और जय गोलू देवता महिला समूह खनिया ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेता टीमों को नकद पुरस्कार और ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया।

प्रतियोगिता को देखने के लिए नगर के साथ ही आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग मंदिर परिसर पहुंचे। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने कुमाऊं की लोक संस्कृति पर आधारित झोड़ा प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य शांति उप्रेती मुख्य अतिथि रहीं, जबकि पूर्व विधायक करन माहरा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।



मुख्य अतिथि शांति उप्रेती ने कहा कि महिलाओं ने अपनी आकर्षक प्रस्तुतियों से साबित किया है कि नारी शक्ति किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन महिलाओं को घरेलू जीवन की व्यस्तता से बाहर निकलकर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और आनंद के पल बिताने का अवसर देते हैं।

पूर्व विधायक करन माहरा ने कहा कि रानीखेत क्षेत्र में सांस्कृतिक गतिविधियों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने कहा कि झोड़ा जैसे पारंपरिक आयोजनों से एक ओर उत्तराखंड की लोक संस्कृति का संरक्षण होता है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय महिलाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए बेहतर मंच मिलता है।



प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त नारी शक्ति रानीखेत को 15 हजार रुपये की पुरस्कार राशि और ट्रॉफी मुख्य अतिथि शांति उप्रेती ने प्रदान की। द्वितीय स्थान पर रहे शिव मंदिर मातृ शक्ति समूह को पूर्व विधायक करन माहरा ने 7,500 रुपये और ट्रॉफी तथा तृतीय स्थान प्राप्त जय गोलू देवता महिला समूह खनिया को विशिष्ट अतिथि गोपाल दत्त उप्रेती ने 5,500 रुपये और ट्रॉफी प्रदान की।

समिति के अनुसार पुरस्कार राशि अध्यक्ष अंशुल साह की ओर से अपने स्वर्गीय पिता किशन लाल साह और माता ज्योति साह की स्मृति में घोषित की गई है। इसके अलावा प्रतियोगिता में शामिल अन्य टीमों को भी सांस्कृतिक समिति के सदस्यों की ओर से विशेष पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।




प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका अल्मोड़ा से आमंत्रित लोककर्मी एवं बाल साहित्यकार उदय किरौला और संस्कृतिकर्मी नारायण सिंह थापा ने निभाई। प्रतियोगिता के बाद निर्णायकों ने प्रतिभागी महिलाओं को झोड़ा और चांचरी की बारीकियों की जानकारी देने के साथ उनकी प्रस्तुतियों की समीक्षा भी की। सांस्कृतिक संयोजक विमल सती ने अतिथियों का स्वागत करते हुए लोक संस्कृति की विभिन्न नृत्य विधाओं के बारे में जानकारी दी।
झोड़ा प्रतियोगिता से पूर्व महिलाओं और छात्राओं के लिए उत्तराखंड की पारंपरिक वेशभूषा प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। इसमें प्रतिभागियों ने उत्तराखंड की अलग-अलग पारंपरिक पोशाकों में प्रस्तुति दी। मुख्य अतिथि प्रभात रावत ने प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। ज्योति साह, पूर्व समिति अध्यक्ष गौरव भट्ट, संरक्षक हरीश लाल साह और प्रायोजक अंशुल साह ने अतिथियों का स्मृति चिह्न देकर स्वागत किया।
कार्यक्रम का संचालन समिति के महासचिव गौरव तिवारी ने किया। इस अवसर पर मां नंदा-सुनंदा सेवा समिति के राजेंद्र पंत, उपाध्यक्ष दीपक पंत, अभिषेक कांडपाल, परमवीर मेहरा, सोनू सिद्दीकी, ललित नेगी सहित समिति के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। आयोजन के दौरान पूरा मंदिर परिसर कुमाऊं की लोक संस्कृति और पारंपरिक झोड़े के रंग में रंगा नजर आया।

