कॉर्बेट से राजाजी भेजे जाएंगे पांच और बाघ, दूसरे चरण की तैयारी शुरू

कॉर्बेट से राजाजी भेजे जाएंगे पांच और बाघ, दूसरे चरण की तैयारी शुरू

स्थान : रामनगर
ब्यूरो रिपोर्ट

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों के स्थानांतरण के दूसरे चरण की तैयारी शुरू हो गई है। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) से अनुमति मिलने के बाद कॉर्बेट प्रशासन ने प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है। दूसरे चरण में एक नर और चार मादा समेत कुल पांच बाघों को कॉर्बेट से राजाजी भेजा जाएगा।

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला के अनुसार दूसरे चरण की अनुमति मिल चुकी है और अब बाघों के चयन की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है। प्रशासन ऐसे क्षेत्रों का आकलन कर रहा है, जहां आबादी के आसपास बाघों की मौजूदगी से भविष्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका अधिक हो सकती है।

दूसरे चरण का उद्देश्य राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ाने के साथ उनके वितरण को बेहतर करना है। इसके अलावा कॉर्बेट के संवेदनशील क्षेत्रों से उपयुक्त बाघों को स्थानांतरित कर मानव-वन्यजीव संघर्ष के जोखिम को कम करने की रणनीति भी इस योजना से जुड़ी हुई है।

इससे पहले प्रथम चरण में कॉर्बेट से पांच बाघों को राजाजी टाइगर रिजर्व के पश्चिमी हिस्से में चरणबद्ध तरीके से स्थानांतरित किया गया था। इनमें दो नर और तीन मादा बाघ शामिल थे। पहला बाघ दिसंबर 2020 में भेजा गया था, जबकि पांचवें बाघ के स्थानांतरण के साथ मई 2025 में पहला चरण पूरा हुआ।

डॉ. बडोला ने बताया कि दूसरे चरण में बाघों का चयन केवल स्थानांतरण के उद्देश्य से नहीं किया जाएगा। ऐसे इलाकों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां बाघ मानव आबादी के नजदीक सक्रिय हैं और भविष्य में संघर्ष की स्थिति बनने की आशंका है। चयन में वैज्ञानिक और वन्यजीव प्रबंधन से जुड़े मानकों का भी ध्यान रखा जाएगा।

संभावित बाघों की पहचान के बाद विशेषज्ञ टीम उन्हें ट्रैंकुलाइज करेगी। आवश्यक स्वास्थ्य परीक्षण और अन्य प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद बाघों को रेडियो कॉलर लगाया जाएगा। इसके बाद निर्धारित वन्यजीव स्थानांतरण प्रोटोकॉल के तहत उन्हें विशेष वाहन से सुरक्षित तरीके से राजाजी टाइगर रिजर्व पहुंचाया जाएगा।

राजाजी पहुंचने के बाद बाघों को सीधे जंगल में नहीं छोड़ा जाएगा। उन्हें कुछ दिनों तक विशेष बाड़े में रखकर नए वातावरण के अनुकूल होने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद सॉफ्ट रिलीज प्रक्रिया के तहत बाघों को जंगल में छोड़ा जाएगा। पहले चरण में भी बाघों के स्थानांतरण के लिए सॉफ्ट रिलीज एनक्लोजर और निगरानी व्यवस्था का इस्तेमाल किया गया था।

जंगल में छोड़े जाने के बाद भी इन बाघों की गतिविधियों पर निगरानी जारी रहेगी। रेडियो कॉलर के माध्यम से उनके मूवमेंट, नए क्षेत्र में अनुकूलन और व्यवहार पर नजर रखी जाएगी। कॉर्बेट प्रशासन के सामने फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण काम वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप स्थानांतरण के लिए उपयुक्त बाघों की पहचान करना है।

कॉर्बेट प्रशासन का कहना है कि दूसरे चरण की यह पहल बाघ संरक्षण के साथ राजाजी टाइगर रिजर्व में उनकी आबादी के बेहतर वितरण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। साथ ही आबादी से सटे संवेदनशील क्षेत्रों से चयनित बाघों के स्थानांतरण से भविष्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावित घटनाओं को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।