
स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

NEET-UG 2025 के जरिए एमबीबीएस में प्रवेश के लिए फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण-पत्र के इस्तेमाल के मामले में एसआईटी ने जांच तेज कर दी है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम मामले से जुड़े दस्तावेजों और तथ्यों की गहन पड़ताल कर रही है।

मामले की जांच पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के पर्यवेक्षण में की जा रही है। एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि प्रमाण-पत्र किस आधार पर तैयार किए गए और प्रवेश प्रक्रिया में उनका इस्तेमाल किस तरह किया गया।


जांच में सामने आया है कि संबंधित अभ्यर्थियों ने धर्मवीर के नाम से जारी बताए गए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण-पत्र का लाभ लेकर एमबीबीएस में प्रवेश हासिल किया। पुलिस का कहना है कि संबंधित प्रमाण-पत्रों की वैधता पर गंभीर सवाल सामने आए हैं।


एसआईटी ने जांच के दौरान धर्मवीर के परिजनों के बयान दर्ज किए हैं। उनके पुत्र और पौत्र से भी पूछताछ की गई है, ताकि परिवार और प्रमाण-पत्र से जुड़े तथ्यों का सत्यापन किया जा सके।


प्रमाण-पत्रों से जुड़े राजस्व अभिलेखों की भी जांच की जा रही है। इसी क्रम में संबंधित क्षेत्र के पटवारी के बयान दर्ज किए गए हैं और दस्तावेजों की उपलब्धता तथा प्रामाणिकता की पड़ताल की जा रही है।

जांच में एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया है कि चारों अभियुक्तों के अभिलेखों में दर्ज पते सत्यापन के दौरान फर्जी पाए गए। इसके बाद एसआईटी अब आरोपियों की वास्तविक पहचान और पते से संबंधित जानकारी भी जुटा रही है।



पुलिस का कहना है कि पूरे मामले में दस्तावेज तैयार करने, उनका सत्यापन कराने और प्रवेश प्रक्रिया में इस्तेमाल किए जाने की कड़ी को खंगाला जा रहा है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि इस प्रकरण में किसी अन्य व्यक्ति या नेटवर्क की भूमिका तो नहीं रही।
एसआईटी अधिकारियों के अनुसार मामले में आगे की कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

