स्टाइपेंड की मांग को लेकर नर्सिंग छात्रों का प्रदर्शन, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

स्टाइपेंड की मांग को लेकर नर्सिंग छात्रों का प्रदर्शन, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

स्थान : अल्मोड़ा
ब्यूरो रिपोर्ट

राजकीय नर्सिंग कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने शनिवार को स्टाइपेंड की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। छात्रों ने उत्तराखंड में भी उत्तर प्रदेश की तर्ज पर नर्सिंग इंटर्नशिप के दौरान प्रतिमाह 13 हजार रुपये स्टाइपेंड दिए जाने की मांग उठाई।

प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं का कहना है कि नर्सिंग पाठ्यक्रम के तहत छह महीने की इंटर्नशिप अनिवार्य है। इस दौरान उन्हें अस्पतालों में नियमित रूप से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्य करने पड़ते हैं, लेकिन इसके बदले उन्हें किसी प्रकार का मानदेय या स्टाइपेंड नहीं दिया जा रहा है।

छात्रों ने बताया कि इंटर्नशिप के दौरान वे प्रतिदिन करीब 10 से 12 घंटे तक अस्पताल में सेवाएं देते हैं। मरीजों की देखभाल से लेकर अन्य स्वास्थ्य सेवाओं में भी उनका सहयोग रहता है। इसके बावजूद आर्थिक सहायता नहीं मिलने से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अन्य राज्यों में नर्सिंग इंटर्न को स्टाइपेंड दिए जाने की व्यवस्था है। इसी आधार पर उन्होंने उत्तराखंड सरकार से भी नर्सिंग इंटर्न को प्रतिमाह 13 हजार रुपये मानदेय देने की व्यवस्था लागू करने की मांग की है।

छात्र-छात्राओं ने कहा कि लंबे समय से इस मांग को सरकार और संबंधित विभाग के सामने रखा जा रहा है। उनका कहना है कि इंटर्नशिप के दौरान पूरी जिम्मेदारी के साथ अस्पतालों में सेवा देने के बावजूद उनकी मांग पर अब तक ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।

छात्रों के अनुसार पूर्व में डॉ. धन सिंह रावत की ओर से नर्सिंग छात्रों से संबंधित डेटा जुटाकर मानदेय के मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि काफी समय बीतने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दी है, जिससे छात्रों में नाराजगी बढ़ रही है।

प्रदर्शन के दौरान छात्र-छात्राओं ने कहा कि स्टाइपेंड केवल आर्थिक सहायता का विषय नहीं है, बल्कि अस्पतालों में दी जा रही उनकी सेवाओं के सम्मान से भी जुड़ा मामला है। उन्होंने सरकार से जल्द नीति बनाकर उनकी मांग पूरी करने की अपील की।

छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही स्टाइपेंड को लेकर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मांग पूरी होने तक वे अपनी आवाज सरकार और संबंधित विभाग तक पहुंचाते रहेंगे।