
स्थान : चमोल
रिपोर्टर : विनोद पांडे

मां नंदा देवी की लोकजात यात्रा शुक्रवार को नंदा सप्तमी के अवसर पर उच्च हिमालयी क्षेत्र वेदनी बुग्याल पहुंची। वेदनी कुंड में विधि-विधान से पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होने के बाद मां नंदा की डोली वापसी यात्रा पर सिद्धपीठ देवराड़ा के लिए रवाना हो गई।

इस वर्ष मां नंदा की यात्रा को लेकर विशेष स्थिति बनी हुई है। एक ओर वार्षिक लोकजात वेदनी तक पहुंचकर वापस लौट रही है, वहीं दूसरी ओर 12 वर्ष के अंतराल पर आयोजित बड़ी जात की डोली होमकुंड की ओर आगे बढ़ रही है। दोनों यात्राओं के अलग-अलग कार्यक्रमों के कारण इस बार नंदा देवी यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं के बीच विशेष चर्चा है।


लोकजात के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मां नंदा की डोली पांच सितंबर को यात्रा पर निकली थी। विभिन्न गांवों और पड़ावों से गुजरते हुए यात्रा वाण और गैरोली पातल के बाद 18 सितंबर को वेदनी बुग्याल पहुंची, जहां नंदा सप्तमी पर विशेष पूजा संपन्न हुई।


वेदनी में पूजा-अर्चना के दौरान श्रद्धालुओं ने मां नंदा को पारंपरिक रूप से कैलाश के लिए विदाई दी। इसके बाद लोकजात की डोली वापसी मार्ग पर निकल गई। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार विभिन्न पड़ावों से होते हुए 25 सितंबर को डोली सिद्धपीठ देवराड़ा पहुंचेगी, जहां यात्रा का समापन होगा।



दूसरी ओर मां नंदा देवी की बड़ी जात का दल अभी उच्च हिमालयी क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। 19 सितंबर को यात्रा पातर नचौंणियां, कलवा विनायक, रूपकुंड और ज्यूंरागली होते हुए शिलासमुद्र पहुंचेगी। इसके बाद 20 सितंबर को होमकुंड में मुख्य धार्मिक अनुष्ठान होगा।
होमकुंड में विशेष पूजा-अर्चना और तर्पण के बाद चौसिंग्या खाडू को कैलाश की ओर विदा करने की परंपरा निभाई जाएगी। इसी के साथ बड़ी जात का मुख्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होगा और मां नंदा की डोली वापसी यात्रा शुरू करेगी।




बड़ी जात की वापसी जामुनडाली, सुतोल, वाण और अन्य पारंपरिक पड़ावों से होते हुए होगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 30 सितंबर को डोली सिद्धपीठ कुरुड़ पहुंचेगी, जहां विधिवत पूजा के साथ बड़ी जात यात्रा का समापन किया जाएगा।
इस वर्ष नंदा देवी की यात्राओं के आयोजन को लेकर पहले से ही विभिन्न समितियों के बीच अलग-अलग निर्णय सामने आए थे। नौटी से जुड़ी मुख्य राजजात को 2027 में आयोजित करने का निर्णय लिया गया, जबकि कुरुड़ क्षेत्र के हक-हकूकधारियों ने 2026 में ही बड़ी जात आयोजित करने का फैसला किया। इसी बीच बधाण क्षेत्र की वार्षिक लोकजात का अलग कार्यक्रम भी जारी किया गया।

इन परिस्थितियों के कारण वर्ष 2026 की नंदा यात्रा उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में एक विशेष अध्याय बन गई है। एक तरफ वेदनी में लोकजात के अनुष्ठान के बाद डोली वापसी पर है, तो दूसरी तरफ बड़ी जात 20 सितंबर को होमकुंड में होने वाली पूजा और चौसिंग्या खाडू की विदाई के महत्वपूर्ण पड़ाव की ओर बढ़ रही है।

