
स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष के पास ठोस मुद्दों की कमी है और वह इस संवेदनशील प्रकरण को लेकर लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि अंकिता भंडारी के साथ हुई घटना से पूरा प्रदेश आहत हुआ था और राज्य सरकार ने शुरुआत से ही मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने कहा कि घटना सामने आने के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी की गई और मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया गया था।



अंकिता भंडारी हत्याकांड में पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को कोटद्वार की अदालत ने 30 मई 2025 को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। तीनों दोषी जेल में हैं, जबकि मामले से जुड़ी आगे की न्यायिक कार्यवाही भी जारी रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अंकिता के माता-पिता की मांग और भावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने मामले की सीबीआई जांच की संस्तुति की थी। जनवरी 2026 में राज्य सरकार ने केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने की सिफारिश की थी।



इसके बाद सीबीआई ने मामले में नई एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। जांच में विशेष रूप से मामले से जुड़े कथित ‘वीआईपी’ पहलू और अन्य नए दावों की पड़ताल किए जाने की बात सामने आई थी।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सीबीआई सभी पहलुओं की जांच करेगी और जांच के बाद वास्तविक तथ्य सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा है कि प्रकरण से जुड़ा कोई भी तथ्य जांच से बाहर न रहे और पीड़ित परिवार को न्याय मिले।



विपक्ष पर हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस कभी चुनाव आयोग, ईवीएम और प्रशासन तो कभी अन्य प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठाती है। मुख्यमंत्री का कहना था कि अंकिता भंडारी जैसे संवेदनशील मामले को भी राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।
दूसरी ओर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस प्रकरण में लगातार सवाल उठाते रहे हैं। विपक्ष ने कथित ‘वीआईपी’ की पहचान और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि अंकिता के माता-पिता भी सीबीआई जांच में इस पहलू की विस्तृत पड़ताल की मांग कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार न्याय और पारदर्शिता के साथ काम कर रही है तथा जांच एजेंसी को अपना काम करने दिया जाना चाहिए। अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, जबकि सीबीआई जांच के निष्कर्ष का इंतजार बना हुआ है।

