वाण पहुंची मां नंदा देवी की बड़ी जात, अब शुरू होगा दुर्गम हिमालयी सफर

वाण पहुंची मां नंदा देवी की बड़ी जात, अब शुरू होगा दुर्गम हिमालयी सफर

स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड की प्रसिद्ध मां नंदा देवी बड़ी जात यात्रा अपने सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण चरण में पहुंच गई है। करीब 296 किलोमीटर की इस धार्मिक पैदल यात्रा का कारवां आबादी के अंतिम गांव वाण पहुंच चुका है। यहां मां नंदा की डोलियों का धर्म भाई लाटू देवता से पारंपरिक मिलन हुआ, जिसे देखने के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंचे।

सिद्धपीठ कुरुड़ से 5 सितंबर को शुरू हुई बड़ी जात यात्रा गांवों और विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए वाण पहुंची है। यात्रा को ‘हिमालयी महाकुंभ’ भी कहा जाता है। वाण से आगे का सफर उच्च हिमालयी और निर्जन क्षेत्र से होकर गुजरता है, जहां यात्रियों के लिए कठिन चढ़ाई और बदलता मौसम बड़ी चुनौती रहेगा।

वाण गांव में बड़ी जात में शामिल कुरुड़-दशोली की नंदा डोली, बंड क्षेत्र की डोली सहित कई देव डोलियों और छंतोलियों का मिलन हुआ। पारंपरिक जागरों, ढोल-दमाऊं और मां नंदा के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया।

अब यात्रा वाण से आगे गैरोली पातल और बेदनी बुग्याल की ओर बढ़ेगी। इसके बाद पातर नचौणियां, कैलवा विनायक, रूपकुंड और ज्यूंरागली जैसे दुर्गम उच्च हिमालयी क्षेत्रों से होते हुए बड़ी जात का कारवां होमकुंड की ओर जाएगा।

यात्रा का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव बेदनी बुग्याल माना जा रहा है। यहीं विभिन्न डोलियों और परंपरागत यात्राओं के आगे के कार्यक्रम को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है। लोकजात से जुड़ी डोलियों के बेदनी में धार्मिक अनुष्ठान के बाद लौटने अथवा बड़ी जात के साथ आगे बढ़ने को लेकर श्रद्धालुओं की निगाहें भी इसी पड़ाव पर टिकी हैं।

वाण के बाद निर्जन पड़ाव शुरू होने के कारण यात्रा व्यवस्थाएं भी अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती हैं। भोजन, चिकित्सा, सुरक्षा और यात्रियों की आवाजाही को लेकर प्रशासन तथा यात्रा से जुड़े आयोजक व्यवस्थाओं पर नजर बनाए हुए हैं। पहले से निर्धारित यात्रा कार्यक्रम में पांच निर्जन पड़ावों से गुजरने का उल्लेख किया गया है।

इस बार बड़ी जात को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। कनोल और वाण जैसे पड़ावों पर हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी दर्ज की गई है और लगातार लोग यात्रा में शामिल हो रहे हैं। हालांकि पूरे यात्रा मार्ग पर शामिल श्रद्धालुओं की कुल संख्या को लेकर कोई पुष्ट आधिकारिक आंकड़ा फिलहाल सामने नहीं आया है।

वाण स्थित लाटू धाम से आगे बढ़ने के साथ ही मां नंदा की यात्रा अब आस्था के साथ कठिन हिमालयी परीक्षा के दौर में प्रवेश कर रही है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बड़ी जात को होमकुंड तक पहुंचना है, जहां चौसिंग्या खाडू को मां नंदा के साथ कैलाश के लिए विदा किए जाने की परंपरा है।