फैसला सुरक्षित था तो मंत्री को कैसे मिली जानकारी? कांग्रेस ने उठाए सवाल, जांच की मांग

फैसला सुरक्षित था तो मंत्री को कैसे मिली जानकारी? कांग्रेस ने उठाए सवाल, जांच की मांग

स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी से जुड़े आय से अधिक संपत्ति के आरोपों वाले मामले में कांग्रेस ने नया सवाल उठाया है। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता एवं अधिवक्ता पंकज सिंह क्षेत्री ने प्रेस वार्ता कर न्यायिक प्रक्रिया के दौरान मंत्री की ओर से दिए गए कथित बयान की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

पंकज क्षेत्री ने कहा कि उत्तराखंड हाईकोर्ट में विकेश सिंह नेगी बनाम उत्तराखंड राज्य से संबंधित आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर 8 सितंबर 2026 को दोनों पक्षों की बहस पूरी हो गई थी। इसके बाद न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। हाईकोर्ट से जुड़े उपलब्ध अदालती घटनाक्रम में भी इसकी पुष्टि होती है।

कांग्रेस प्रवक्ता का आरोप है कि फैसला सार्वजनिक रूप से सुनाए जाने से पहले ही 11 सितंबर को कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने मीडिया के सामने उनके खिलाफ दायर याचिका खारिज होने की बात कही। इसी कथित बयान को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाया कि न्यायालय का फैसला आने से पहले उसके परिणाम की जानकारी कैसे सामने आई।

मामले में 15 सितंबर को हाईकोर्ट की एकलपीठ ने पूर्व में सुरक्षित रखे गए फैसले को जारी नहीं किया। न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की पीठ ने कहा कि कुछ अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण उसी पीठ द्वारा मामले का निर्णय किया जाना उचित नहीं होगा।

इसके बाद अदालत ने रजिस्ट्री को आपराधिक पुनरीक्षण याचिका मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, ताकि मामले की सुनवाई और निर्णय के लिए दूसरी पीठ नामित की जा सके। इस स्तर पर याचिका के गुण-दोष पर हाईकोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आया है।

पंकज क्षेत्री ने कहा कि 8 सितंबर को फैसला सुरक्षित होने, 11 सितंबर को मंत्री के कथित बयान और इसके बाद मामले को दूसरी पीठ के समक्ष भेजे जाने के पूरे घटनाक्रम की जांच होनी चाहिए। उन्होंने इसे न्यायिक प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर विषय बताया।

कांग्रेस नेता ने मांग की कि पूरे मामले में उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जांच पूरी होने तक गणेश जोशी को मंत्री पद से इस्तीफा देना चाहिए। यह कांग्रेस की राजनीतिक मांग है और मामले में किसी कानूनी जिम्मेदारी या आरोप का अंतिम निर्धारण सक्षम न्यायिक अथवा जांच प्रक्रिया से ही होगा।

आय से अधिक संपत्ति के आरोपों से संबंधित मूल मामले में देहरादून निवासी विकेश नेगी की याचिका को वर्ष 2025 में विशेष न्यायाधीश विजिलेंस/अपर जिला जज की अदालत ने खारिज कर दिया था, जिसके बाद आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। अब नई पीठ के नामांकन के बाद आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय होगी।