
लोकेशन-: रूड़की
ब्यूरो रिपोर्ट


उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के इस्तीफे को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच पूर्व राज्यमंत्री आदित्य राणा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर कांग्रेस नेताओं को राजनीतिक रूप से घेरने और प्रदेश का माहौल प्रभावित करने के प्रयास करने का आरोप लगाया है।


आदित्य राणा ने कहा कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा कांग्रेस की बढ़ती सक्रियता से परेशान है। उनका आरोप है कि इसी कारण कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को अलग-अलग मुद्दों के जरिए दबाव में लाने की कोशिश की जा रही है।



राणा ने आरोप लगाया कि केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर भी कांग्रेस नेताओं के बीच भय का माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इन परिस्थितियों से डरने वाली नहीं है और पार्टी कार्यकर्ता मजबूती के साथ राजनीतिक मुकाबला करेंगे।


पूर्व राज्यमंत्री ने भाजपा पर मंदिर-मस्जिद और हिंदू-मुस्लिम जैसे मुद्दों को उठाकर समाज में विभाजन पैदा करने का भी आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने कहा कि अब पहाड़ और मैदानी क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक रंग देकर प्रदेश की जनता को बांटने की कोशिश की जा रही है।


आदित्य राणा का दावा है कि उत्तराखंड की जनता इन मुद्दों को समझ रही है और आने वाले विधानसभा चुनाव में इसका जवाब देगी। उन्होंने विश्वास जताया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रदेश में सरकार बनाने में सफल होगी।
हरीश रावत को लेकर उठी इस्तीफे की चर्चा के बीच यह भी स्पष्ट हुआ है कि उन्होंने कांग्रेस छोड़ने की घोषणा नहीं की है। रिपोर्टों के मुताबिक रावत ने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी और कांग्रेस वर्किंग कमेटी में स्थायी आमंत्रित सदस्य जैसे संगठनात्मक पदों से हटने की बात कही है। उन्होंने कांग्रेस के साथ अपने संबंध बने रहने की बात भी स्पष्ट की है।



यह घटनाक्रम हरीश रावत के पूर्व सहयोगी से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बाद सामने आया है। रावत ने कहा है कि उनकी वजह से कांग्रेस की भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई कमजोर नहीं होनी चाहिए, जबकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस से ईडी की कार्रवाई का राजनीतिकरण न करने की बात कही है।

फिलहाल हरीश रावत से जुड़े घटनाक्रम को लेकर उत्तराखंड की राजनीति गरमाई हुई है। आदित्य राणा के आरोपों ने इस सियासी बहस को और तेज कर दिया है, जबकि उनके भाजपा पर लगाए गए आरोप राजनीतिक बयान हैं और भाजपा का इस विशेष बयान पर पक्ष सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए।

