

स्थान : लक्सर
ब्यूरो रिपोर्ट


हरिद्वार जिले के अकोढ़ा खुर्द गांव में ग्राम पंचायत उपचुनाव को लेकर नया विवाद सामने आया है। उपचुनाव में एक प्रत्याशी के नामांकन और प्रस्तुत दस्तावेजों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और जिलाधिकारी हरिद्वार से शिकायत की है। शिकायत में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की गई है।


जानकारी के अनुसार, अकोढ़ा खुर्द ग्राम पंचायत में बीती 12 अक्टूबर को उपचुनाव संपन्न हुआ था। इस चुनाव में प्रत्याशी रेखा रानी ने मुकर्मपुर से नामांकन दाखिल किया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान प्रत्याशी की संतान संबंधी जानकारी और आवश्यक दस्तावेजों को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए थे, लेकिन इनका नियमानुसार परीक्षण नहीं किया गया।




शिकायत में दावा किया गया है कि प्रत्याशी रेखा रानी की कुल चार संतान थीं, जिनमें से एक बच्चे की मृत्यु हो चुकी है। शिकायतकर्ता के अनुसार नामांकन के समय इस संबंध में आवश्यक कानूनी दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने चाहिए थे। आरोप है कि मृत बच्चे से संबंधित मृत्यु प्रमाण पत्र, शपथ पत्र और अन्य आवश्यक अभिलेख नामांकन पत्र के साथ जमा नहीं कराए गए।


शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि नामांकन के दौरान जरूरी स्टांप पेपर और अन्य दस्तावेज नियमानुसार उपलब्ध नहीं कराए गए। उनका कहना है कि निर्वाचन प्रक्रिया में सभी आवश्यक जानकारियों और अभिलेखों का सही तरीके से प्रस्तुत किया जाना जरूरी है। ऐसे में कथित रूप से अधूरे दस्तावेजों के आधार पर नामांकन स्वीकार किए जाने से पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।



इस मामले में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि प्रत्याशी की ओर से महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर चुनाव लड़ा गया। उनका कहना है कि यदि नामांकन प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का उल्लंघन हुआ है तो इसकी जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। हालांकि प्रत्याशी की पात्रता और दस्तावेजों की वैधता को लेकर लगाए गए आरोपों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
शिकायत में चुनाव प्रक्रिया के दौरान सरकारी मशीनरी और धन के कथित दुरुपयोग का मुद्दा भी उठाया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उपचुनाव में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं की अनदेखी की गई। उन्होंने मांग की है कि नामांकन से लेकर मतदान तक की प्रक्रिया से जुड़े अभिलेखों की जांच की जाए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।



शिकायतकर्ता के अनुसार नामांकन को लेकर आपत्ति दर्ज कराए जाने के दौरान संबंधित स्तर से नामांकन निरस्त करने का आश्वासन दिया गया था। इसके बावजूद प्रत्याशी का नामांकन निरस्त नहीं किया गया और चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ गई। शिकायतकर्ता ने इस पूरे घटनाक्रम में संबंधित अधिकारियों की भूमिका और आपत्ति के निस्तारण की प्रक्रिया की भी जांच कराने की मांग की है।


शिकायतकर्ता ने अब मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और जिलाधिकारी हरिद्वार से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने नामांकन से संबंधित दस्तावेजों, संतान संबंधी अभिलेखों और दर्ज आपत्तियों की जांच कर दोष पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग उठाई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि निष्पक्ष जांच से ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल इस मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही संबंधित प्रत्याशी अथवा निर्वाचन अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आया है। उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड के पंचायत निर्वाचन संबंधी प्रावधानों में दो से अधिक जीवित संतानों की पात्रता के मामले में जन्मतिथि और निर्धारित अपवाद भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए केवल कुल संतानों की संख्या के आधार पर प्रत्याशी को अयोग्य नहीं माना जा सकता। PRS Legislative Research+1
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन शिकायत में उठाए गए सवालों की जांच कर क्या कार्रवाई करता है और नामांकन प्रक्रिया को लेकर पैदा हुए विवाद का किस प्रकार निस्तारण किया जाता है।

