बंजर जमीन पर फूल खिलाकर स्वरोजगार की राह बना रहीं पौड़ी की महिलाएं, दीपावली पर स्थानीय फूलों से तैयार कीं मालाएं

बंजर जमीन पर फूल खिलाकर स्वरोजगार की राह बना रहीं पौड़ी की महिलाएं, दीपावली पर स्थानीय फूलों से तैयार कीं मालाएं

स्थान : पौड़ी
ब्यूरो रिपोर्ट

कभी कूड़े के ढेर और कंटीली झाड़ियों से पटी रहने वाली बंजर जमीन को खूबसूरत फूलों की बगिया में बदलने वाली पौड़ी हरित क्रांति समिति की महिलाएं अब स्वरोजगार की दिशा में नई मिसाल पेश कर रही हैं। दीपावली के अवसर पर समिति की महिलाओं ने स्थानीय पुष्प वाटिकाओं में उगाए गए फूलों से आकर्षक मालाएं तैयार कर बाजार में उपलब्ध कराने की पहल की है। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर फूलों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और पर्यटन नगरी पौड़ी की सुंदरता को बढ़ावा देना है।

पौड़ी शहर के पुल्ड हाउस स्थित त्रिशूल पार्क के आसपास विकसित पुष्प वाटिकाएं इन दिनों आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। यहां विभिन्न प्रजातियों के रंग-बिरंगे फूल खिले हुए हैं। दीपावली के पर्व को देखते हुए समिति की महिलाओं ने इन वाटिकाओं से फूल एकत्र कर लक्ष्मी पूजन के लिए मालाएं तैयार की हैं। इन मालाओं को स्थानीय बाजार में उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि शहरवासियों को पूजा के लिए फूलों की खरीदारी करने दूसरे शहरों पर निर्भर न रहना पड़े।

पौड़ी हरित क्रांति समिति की उपाध्यक्ष रेखा चौहान ने बताया कि समिति की महिलाएं पिछले चार वर्षों से शहर को हरा-भरा और सुंदर बनाने के अभियान में जुटी हुई हैं। इस दौरान महिलाओं ने बिना किसी सरकारी आर्थिक सहायता के अपनी मेहनत और सामूहिक प्रयासों से शहर के कई उपेक्षित स्थानों की तस्वीर बदल दी है। जहां पहले कूड़े के ढेर, कंटीली झाड़ियां और बंजर जमीन दिखाई देती थी, वहां आज रंग-बिरंगे फूलों की खूबसूरत वाटिकाएं विकसित हो चुकी हैं।

रेखा चौहान ने बताया कि अभियान की शुरुआत शहर के ऐसे स्थानों को चिह्नित करने से हुई, जहां लोग गंदगी और झाड़ियों के कारण जाने से भी कतराते थे। समिति की महिलाओं ने इन स्थानों की साफ-सफाई कर मिट्टी को पौधरोपण के अनुकूल बनाया और विभिन्न प्रजातियों के फूल लगाए। नियमित देखभाल, सिंचाई और मेहनत के परिणामस्वरूप ये स्थान अब सुंदर पुष्प वाटिकाओं के रूप में विकसित हो गए हैं।

समिति की इस पहल से न केवल शहर का सौंदर्यीकरण हुआ है, बल्कि कई स्थान लोगों के आकर्षण का केंद्र भी बन गए हैं। फूलों से सजी वाटिकाओं की सुंदरता स्थानीय लोगों और पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। इनमें से कुछ स्थान सेल्फी प्वाइंट के रूप में भी पहचान बनाने लगे हैं। समिति का प्रयास है कि पर्यटन नगरी पौड़ी की प्राकृतिक सुंदरता को और निखारा जाए, जिससे शहर की अलग पहचान बन सके।

अब समिति की महिलाएं पुष्प उत्पादन को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में भी कदम बढ़ा रही हैं। दीपावली के अवसर पर लक्ष्मी पूजन के लिए फूलों की मालाएं तैयार करना इसी प्रयास का हिस्सा है। महिलाओं का मानना है कि यदि स्थानीय स्तर पर फूलों का उत्पादन बढ़ाया जाए तो लोगों को बाहर से फूल मंगाने की आवश्यकता कम होगी। साथ ही स्थानीय महिलाओं के लिए आय के नए अवसर भी उपलब्ध हो सकेंगे।

समिति की उपाध्यक्ष रेखा चौहान ने कहा कि पुष्प वाटिकाओं से तैयार फूलों की बिक्री से फिलहाल सीमित आय होने की संभावना है, लेकिन यह महिला स्वावलंबन की दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआत है। उन्होंने बताया कि समूह का उद्देश्य केवल फूलों की बिक्री करना नहीं, बल्कि स्थानीय संसाधनों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना भी है। भविष्य में पुष्प उत्पादन को और अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

वहीं, पौड़ी हरित क्रांति समिति ने अपने अभियान को विस्तार देने के लिए सरकार और स्थानीय प्रशासन से सहयोग की अपील की है। महिलाओं का कहना है कि यदि पुष्प उत्पादन, पौधों की देखभाल और वाटिकाओं के विकास के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो शहर के अन्य उपेक्षित स्थानों को भी सुंदर बनाया जा सकता है। इससे पर्यावरण संरक्षण और शहर के सौंदर्यीकरण के साथ महिलाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिलेगी।

इस अवसर पर पौड़ी हरित क्रांति समिति की उपाध्यक्ष रेखा चौहान, सदस्य निकिता, रजनी नेगी, पुष्पा रावत, विभूति खक्रियाल, साधना, नागी देवी, रेखा देवी, बबीता पटवाल और सामाजिक कार्यकर्ता पार्वती रावत मौजूद रहीं। समिति की महिलाओं का यह प्रयास दिखाता है कि सामूहिक मेहनत और दृढ़ संकल्प से उपेक्षित स्थानों को सुंदर बनाने के साथ आजीविका के नए रास्ते भी तैयार किए जा सकते हैं। दीपावली पर स्थानीय फूलों से बनी मालाओं की पहल पौड़ी में पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार का नया संदेश दे रही है।