

स्थान : जसपुर
रिपोर्टर: प्रदीप श्रीवास्तव


एक ओर धनतेरस और दीपावली के पर्व को लेकर बाजारों में उत्साह का माहौल है, वहीं दूसरी ओर जसपुर विधानसभा क्षेत्र की बेटियां नंदा गौरा योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। धनतेरस के अवसर पर योजना की धनराशि नहीं मिलने से नाराज छात्राओं ने बाल विकास परियोजना अधिकारी ग्रामीण कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी छात्राओं का आरोप है कि पिछले छह वर्षों से उन्हें योजना के तहत मिलने वाली 51 हजार रुपये की धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है।


जसपुर विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में छात्राएं धनतेरस के अवसर पर बाल विकास परियोजना अधिकारी ग्रामीण कार्यालय पहुंचीं। छात्राओं को उम्मीद थी कि दीपावली से पहले उनकी लंबित धनराशि के भुगतान को लेकर कोई सकारात्मक कार्रवाई होगी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं होने पर उन्होंने कार्यालय के बाहर धरना शुरू कर दिया। इस दौरान छात्राओं और उनके समर्थन में पहुंचे लोगों ने बाल विकास विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए लंबित भुगतान जल्द जारी करने की मांग की।




प्रदर्शनकारी छात्राओं ने बताया कि उन्होंने कक्षा 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद नंदा गौरा योजना के अंतर्गत मिलने वाली 51 हजार रुपये की आर्थिक सहायता के लिए आवेदन किया था। इसके बावजूद छह वर्ष बीत जाने के बाद भी उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। उनका कहना है कि आर्थिक सहायता प्राप्त करने के लिए वे कई बार संबंधित विभागीय कार्यालयों के चक्कर काट चुकी हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ है।



धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे बैलजोड़ी क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य चरनजीत सिंह चन्नी ने बताया कि कुछ छात्राओं ने उनसे संपर्क कर नंदा गौरा योजना की धनराशि नहीं मिलने की शिकायत की थी। इसके बाद उन्होंने मामले को संबंधित अधिकारियों के सामने उठाया। उन्होंने कहा कि छात्राओं की समस्याओं को लेकर विभिन्न स्थानों पर आयोजित शिविरों में भी आवाज उठाई गई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकलने के कारण बेटियों के अधिकारों के लिए धरना-प्रदर्शन करना पड़ा।


जिला पंचायत सदस्य चरनजीत सिंह चन्नी ने दावा किया कि जसपुर विधानसभा क्षेत्र की करीब 388 बेटियां अभी भी नंदा गौरा योजना के लाभ से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला छात्राओं के भविष्य और उनके अधिकारों से जुड़ा हुआ है। सरकार की ओर से बेटियों को शिक्षा और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन पात्र छात्राओं को समय पर लाभ नहीं मिलने से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर धनतेरस और दीपावली के अवसर पर अधिकारियों और कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की जा रही है, वहीं दूसरी ओर बेटियां वर्षों से अपनी लंबित आर्थिक सहायता के लिए भटक रही हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू संस्कृति में बेटियों को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है, लेकिन धनतेरस के दिन भी उन्हें अपनी ही योजना की धनराशि के लिए सरकारी कार्यालय के बाहर धरना देना पड़ रहा है।



प्रदर्शन में शामिल छात्राओं ने कहा कि दीपावली का पर्व खुशियों और समृद्धि का प्रतीक है। उन्हें उम्मीद थी कि त्योहार से पहले नंदा गौरा योजना की लंबित धनराशि मिल जाएगी, जिससे उनके परिवारों को भी आर्थिक राहत मिलेगी। लेकिन भुगतान नहीं होने से उन्हें निराशा हाथ लगी है। छात्राओं ने शासन और प्रशासन से मामले का जल्द संज्ञान लेकर धनराशि जारी करने की मांग की है।


वहीं, मामले में बाल विकास परियोजना अधिकारी ग्रामीण नेहा बेलवाल ने बताया कि विभागीय स्तर से संबंधित छात्राओं के समस्त अभिलेखों की जांच कर ली गई है। जांच के बाद आवश्यक दस्तावेज जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेज दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग की ओर से आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर प्रकरण शासन स्तर पर भेजा जा चुका है। अब आगे की कार्रवाई शासन स्तर से होनी है।

इधर, जिला पंचायत सदस्य चरनजीत सिंह चन्नी और प्रदर्शनकारी छात्राओं ने चेतावनी दी है कि जब तक वंचित बेटियों को नंदा गौरा योजना के अंतर्गत मिलने वाली धनराशि नहीं मिल जाती, तब तक उनके अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने शासन से लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण करने की मांग की। धनतेरस के अवसर पर हुआ यह प्रदर्शन बेटियों के लिए संचालित सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर उपलब्ध कराने और लंबित भुगतान के निस्तारण की आवश्यकता को सामने लाता है।

