हल्द्वानी में मंडी समिति अध्यक्ष का कांग्रेस पर तीखा हमला, बोले—जनता को गुमराह कर रही कांग्रेस, 2027 में फिर बनेगी भाजपा सरकार

हल्द्वानी में मंडी समिति अध्यक्ष का कांग्रेस पर तीखा हमला, बोले—जनता को गुमराह कर रही कांग्रेस, 2027 में फिर बनेगी भाजपा सरकार

स्थान : हल्द्वानी
रिपोर्टर : पंकज सक्सेना

उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। इसी क्रम में बुधवार को हल्द्वानी के एक निजी रेस्टोरेंट में मंडी समिति के अध्यक्ष ने कांग्रेस के चलाए जा रहे अभियान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पास प्रदेश के विकास को लेकर कोई स्पष्ट उद्देश्य नहीं है और पार्टी केवल राजनीतिक विरोध के लिए सरकार के विकास कार्यों का विरोध कर रही है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश में लगातार विकास कार्य हो रहे हैं और वर्ष 2027 में एक बार फिर भाजपा की सरकार बनेगी।

मंडी समिति के अध्यक्ष ने कांग्रेस के भूमि संबंधी अभियान पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश सरकार बंजर भूमि का उपयोग विकास कार्यों के लिए करने की दिशा में काम कर रही है, लेकिन कांग्रेस इसका भी विरोध कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस विकास कार्यों को लेकर जनता के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है। उनका कहना था कि राज्य में जनहित और विकास से जुड़े कार्यों का विरोध करने के बजाय कांग्रेस को सकारात्मक सुझाव देने चाहिए।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार प्रदेश के विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। सरकार की ओर से विभिन्न क्षेत्रों में विकास योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है, जिनका उद्देश्य प्रदेश में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना और जनता को लाभ पहुंचाना है। मंडी समिति अध्यक्ष ने दावा किया कि भाजपा सरकार की विकास नीतियों को जनता का समर्थन मिल रहा है।

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के पास सरकार के खिलाफ कोई ठोस मुद्दा नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस केवल राजनीतिक विरोध के उद्देश्य से भाजपा सरकार पर आरोप लगा रही है। उनका दावा था कि प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों से कांग्रेस के नेता परेशान हैं और इसी कारण सरकार की योजनाओं तथा निर्णयों का लगातार विरोध किया जा रहा है।

मंडी समिति अध्यक्ष ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में विकास योजनाओं के लिए भूमि का सुनियोजित उपयोग आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस बंजर भूमि पर विकास परियोजनाएं संचालित करने के सरकार के प्रयासों का भी विरोध कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जनता की सुविधाओं और राज्य के विकास को ध्यान में रखकर निर्णय ले रही है, जबकि कांग्रेस इन निर्णयों पर राजनीतिक विवाद खड़ा कर रही है।

वहीं, कांग्रेस ने 4 नवंबर से प्रदेश में ‘भूमि बचाओ, धामी हटाओ’ अभियान के तहत सरकारी जमीनों और सार्वजनिक संपत्तियों के कथित दुरुपयोग के विरोध में प्रदर्शन का कार्यक्रम घोषित किया है। हल्द्वानी में रानीबाग स्थित एचएमटी की करीब 53 एकड़ भूमि को लेकर विधायक तिलकराज बेहड़ और सुमित हृदयेश को अभियान की जिम्मेदारी दी गई है। कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश की महत्वपूर्ण सरकारी जमीनों को निजी हितों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

मंडी समिति अध्यक्ष ने कांग्रेस के इन आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष केवल सरकार को बदनाम करने की राजनीति कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में विकास कार्यों को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के प्रत्येक निर्णय का विरोध कर रही है, जबकि भाजपा विकास और जनहित के मुद्दों पर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर मंडी समिति अध्यक्ष ने दावा किया कि वर्ष 2027 में उत्तराखंड में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व पर विश्वास है और पार्टी आगामी चुनाव के लिए तैयार है। वहीं, कांग्रेस के पास जनता के सामने रखने के लिए कोई ठोस उद्देश्य नहीं होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष की बयानबाजी से भाजपा के विकास कार्य प्रभावित नहीं होंगे।

हल्द्वानी में मंडी समिति अध्यक्ष के इस बयान के बाद सरकारी जमीनों के उपयोग और विकास परियोजनाओं को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक मतभेद एक बार फिर सामने आए हैं। जहां भाजपा कांग्रेस के भूमि बचाओ अभियान को राजनीतिक विरोध बता रही है, वहीं कांग्रेस सरकारी संपत्तियों के आवंटन और उपयोग में पारदर्शिता की मांग कर रही है। दोनों दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच सरकारी भूमि से जुड़े फैसले आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बनते जा रहे हैं।