
स्थान : बागेश्वर
ब्यूरो रिपोर्ट


उत्तराखंड के बागेश्वर जनपद में करीब तीन सप्ताह से लापता अधिवक्ता एवं भाजपा के युवा नेता धीरेन्द्र परिहार उर्फ कक्कू परिहार की गुमशुदगी के मामले में पुलिस ने हत्या का खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में नुमाइशखेत निवासी लता भंडारी और उसके भाई त्रिभुवन सिंह बिष्ट उर्फ बबलू को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, अधिवक्ता की हत्या करने के बाद शव को कार में रखकर गोमती नदी में फेंक दिया गया था। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने शव बरामद कर लिया है। घटना के सामने आने के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई है।


पुलिस के मुताबिक, अधिवक्ता धीरेन्द्र परिहार 17 अक्टूबर की रात नुमाइशखेत क्षेत्र में रहने वाली लता भंडारी के घर पहुंचे थे। इस दौरान किसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर महिला ने घर में रखी लोहे की रॉड से धीरेन्द्र के सिर पर दो बार वार किया। गंभीर चोट लगने के कारण उनकी मौत हो गई। हालांकि, घटना के पीछे विवाद की वास्तविक वजह और अन्य परिस्थितियों की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है।





पुलिस जांच में सामने आया है कि हत्या के बाद महिला ने शव को घर में ही चारपाई के नीचे छिपा दिया था। आरोप है कि अगले दिन उसने अपने भाई त्रिभुवन सिंह बिष्ट उर्फ बबलू को घटना की जानकारी दी। इसके बाद दोनों ने शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने घटना को छिपाने और साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शव को घर से बाहर ले जाने का निर्णय लिया।


पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों ने रात के समय शव को मेग्नाइट कार संख्या यूके 02 बी 3843 में रखा और बागेश्वर-गिरेछीना मोटर मार्ग की ओर ले गए। इसके बाद थुणाई बैंड के पास से शव को गोमती नदी में फेंक दिया गया। आरोप है कि घटना को छिपाने के लिए शव को सुनसान स्थान पर नदी में फेंका गया, ताकि किसी को हत्या की जानकारी न मिल सके।



इस बीच धीरेन्द्र परिहार के अचानक लापता होने से उनके परिजन लगातार परेशान थे। काफी खोजबीन के बावजूद उनका कोई सुराग नहीं मिलने पर उनकी मां ने 31 अक्टूबर को पुलिस को तहरीर दी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने गुमशुदगी का मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू की। अधिवक्ता एवं भाजपा नेता के लापता होने का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने उनकी तलाश के लिए तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल शुरू की।
पुलिस ने जांच के दौरान धीरेन्द्र परिहार की मोबाइल कॉल डिटेल, मोबाइल सर्विलांस और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच में कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिलने पर पुलिस ने संदिग्धों से पूछताछ की। पुलिस के अनुसार तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर लता भंडारी तथा उसके भाई त्रिभुवन सिंह बिष्ट की भूमिका सामने आई। इसके बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।



आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने 3 नवंबर की शाम बागेश्वर के थुणाई क्षेत्र में गोमती नदी के समीप गहरी खाई से धीरेन्द्र परिहार का शव बरामद किया। दुर्गम स्थान होने के कारण शव को निकालने में पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीमों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई शुरू की। इसके साथ ही हत्या में कथित तौर पर इस्तेमाल की गई लोहे की रॉड और शव ले जाने में प्रयुक्त कार भी बरामद कर ली गई।

अधिवक्ता धीरेन्द्र परिहार की हत्या का मामला सामने आने के बाद बागेश्वर में शोक और आक्रोश का माहौल है। लंबे समय से उनकी तलाश कर रहे परिजनों को शव मिलने की सूचना से गहरा आघात पहुंचा है। धीरेन्द्र परिहार अधिवक्ता होने के साथ नगर पालिका के पूर्व सभासद भी रह चुके थे। घटना को लेकर स्थानीय अधिवक्ताओं और व्यापारियों ने नाराजगी जताई है। जिला बार एसोसिएशन ने भी घटना की निंदा करते हुए आरोपियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस ने गुमशुदगी के मामले में हत्या सहित संबंधित धाराएं जोड़ते हुए दोनों आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। गिरफ्तार लता भंडारी और त्रिभुवन सिंह बिष्ट उर्फ बबलू को न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े सभी साक्ष्यों की जांच की जा रही है और घटना की पूरी परिस्थितियों को स्पष्ट करने का प्रयास जारी है। फिलहाल इस हत्याकांड के खुलासे के बाद पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है, जबकि मृतक के परिजन और स्थानीय लोग मामले में न्याय की मांग कर रहे हैं।

