
स्थान : रामनगर,
संवाददाता : सलीम अहमद साहिल

उत्तराखंड के रामनगर स्थित पूछड़ी क्षेत्र में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई के बाद कई परिवारों के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है। जिन घरों में कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं और परिवार अपने भविष्य के सपने संजोते थे, वहां अब टूटे मकानों का मलबा बिखरा दिखाई दे रहा है। वन विभाग, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में 81 अवैध घोषित संरचनाओं को ध्वस्त कर दिया गया। इस कार्रवाई ने प्रभावित परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है।

पूछड़ी क्षेत्र में वर्षों से रह रहे परिवारों के लिए यह कार्रवाई किसी बड़े संकट से कम नहीं रही। जिन लोगों ने अपनी मेहनत और जमा पूंजी से सिर छिपाने के लिए आशियाने बनाए थे, उनके मकान देखते ही देखते मलबे में तब्दील हो गए। बुलडोजर की कार्रवाई के दौरान कई परिवार अपने घरों का सामान समेटते दिखाई दिए। मकानों के ध्वस्त होने के बाद प्रभावित लोगों के सामने अब रहने और परिवार के भरण-पोषण की चिंता खड़ी हो गई है।




इस कार्रवाई के बीच सबसे मार्मिक मामला एक ऐसे परिवार का सामने आया है, जिसके घर में 5 नवंबर को बेटी की शादी होनी है। जिस आंगन में कुछ ही दिनों बाद शहनाइयां गूंजने वाली थीं और बारात के स्वागत की तैयारियां चल रही थीं, उसी घर पर बुलडोजर चलने से परिवार की खुशियां चिंता में बदल गईं। शादी की तैयारियों के बीच घर उजड़ने से परिवार के सामने बेटी के विवाह की व्यवस्थाएं पूरी करने का बड़ा संकट पैदा हो गया है।


बेटी की शादी से ठीक पहले आशियाना उजड़ने की घटना ने इस कार्रवाई के मानवीय पहलू को भी सामने ला दिया है। एक तरफ प्रशासन सरकारी वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई को नियमों के अनुरूप बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रभावित परिवारों के सामने पुनर्वास और भविष्य की अनिश्चितता जैसे गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि अब वे अपने बच्चों और परिवार के साथ कहां रहेंगे।

तराई पश्चिमी वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी डीएफओ पुनीत तोमर के अनुसार, राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में वन विभाग, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने यह अभियान चलाया। उन्होंने बताया कि भारतीय वन अधिनियम के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए पूछड़ी क्षेत्र में 81 अवैध संरचनाओं को ध्वस्त किया गया। विभाग का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह नियमों और कानूनी प्रावधानों के अनुसार की गई है।

डीएफओ पुनीत तोमर ने स्पष्ट किया कि अभियान के दौरान केवल उन्हीं संरचनाओं को चिह्नित किया गया, जिनके संबंध में वन अधिनियम के तहत कोई दावा लंबित नहीं था और जिन पर न्यायालय की ओर से कोई स्थगन आदेश प्रभावी नहीं था। वन विभाग के अनुसार, कार्रवाई से पहले सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया। विभाग ने इसे सरकारी वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।



अतिक्रमण हटाने के इस बड़े अभियान के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। कार्रवाई के दौरान करीब 850 पुलिसकर्मियों और 250 वनकर्मियों की तैनाती की गई। इसके अतिरिक्त तराई पश्चिमी वन प्रभाग, कॉर्बेट और रामनगर डिवीजन के अधिकारी एवं कर्मचारी भी अभियान में शामिल रहे। भारी मशीनरी और बुलडोजरों की मदद से चिह्नित संरचनाओं को ध्वस्त किया गया। बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी के बीच अभियान को पूरा किया गया।


वन विभाग के अनुसार, पूछड़ी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से की जा रही है। पहले चरण में 51 अवैध संरचनाओं को हटाया गया था, जबकि दूसरे चरण में 81 संरचनाओं को ध्वस्त किया गया। इस तरह दोनों चरणों में कुल 132 संरचनाओं को हटाया जा चुका है। डीएफओ पुनीत तोमर ने बताया कि वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान आगे भी जारी रहेगा।
वहीं, पूछड़ी में हुई इस कार्रवाई के बाद सरकारी भूमि पर बसे अन्य परिवारों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। प्रभावित परिवारों के सामने घर, रोजमर्रा की जरूरतों और बच्चों के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हैं। प्रशासन की ओर से आगे भी अतिक्रमण हटाने का अभियान जारी रखने की बात कहे जाने के बाद अन्य क्षेत्रों में रह रहे लोगों के बीच भी संभावित कार्रवाई को लेकर आशंका बनी हुई है।
फिलहाल रामनगर के पूछड़ी क्षेत्र में बुलडोजर कार्रवाई पूरी होने के बाद कई परिवार अपने उजड़े आशियानों का दर्द झेल रहे हैं। वन विभाग जहां सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई को कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बता रहा है, वहीं प्रभावित परिवारों की मुश्किलें इस अभियान के मानवीय पक्ष को सामने ला रही हैं। सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि बेघर हुए परिवारों के सामने खड़े आवास और पुनर्वास के संकट का समाधान कैसे होगा और वन विभाग की अगली कार्रवाई किस क्षेत्र में की जाएगी।

