
स्थान : श्रीनगर गढ़वाल
ब्यूरो रिपोर्ट

अलकनंदा हाइड्रो पावर (जीवीके) कंपनी के खिलाफ प्रभावित महिलाओं का आंदोलन तेज हो गया है। कंपनी के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने और लंबे समय से पुनर्वास एवं मुआवजे की मांग पूरी नहीं होने का आरोप लगाते हुए भारत संवैधानिक अधिकार संरक्षण मंच के महिला मोर्चा के बैनर तले महिलाओं ने क्रमिक अनशन शुरू कर दिया है। आंदोलनकारी महिलाओं ने प्रशासन और कंपनी प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए अपनी मांगों पर जल्द कार्रवाई की मांग की है।

प्रभावित महिलाओं का आरोप है कि वे लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है। महिलाओं का कहना है कि जीवीके कंपनी से जुड़े पुनर्वास और मुआवजे के मामलों को लेकर बार-बार आवाज उठाने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली है। इसके चलते अब उन्हें धरना-प्रदर्शन और क्रमिक अनशन का सहारा लेना पड़ रहा है।




भारत संवैधानिक अधिकार संरक्षण मंच के प्रभारी दौलत कुंवर ने इस मामले को लेकर ऊर्जा सचिव को पत्र भेजा है। पत्र में उन्होंने धरने पर बैठी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आरोपित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने प्रशासन से आंदोलनकारी महिलाओं की समस्याओं का गंभीरता से संज्ञान लेकर उचित कदम उठाने की अपील की है।


वहीं, आंदोलनकारी महिलाओं को समर्थन देने पहुंचीं उत्तराखंड क्रांति दल की महिला गढ़वाल प्रभारी सरस्वती नेगी ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक ओर देशभर में सुहागिन महिलाएं करवा चौथ का पर्व मनाते हुए अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रख रही हैं, वहीं दूसरी ओर श्रीनगर गढ़वाल में प्रभावित महिलाएं पिछले एक सप्ताह से अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठी हैं।

सरस्वती नेगी ने कहा कि पौड़ी गढ़वाल और टिहरी गढ़वाल दोनों जिलों की जिलाधिकारी महिलाएं हैं, इसके बावजूद करवा चौथ जैसे महत्वपूर्ण पर्व पर धरने पर बैठी महिलाओं की समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों जिलों के प्रशासन ने अब तक आंदोलनकारी महिलाओं की सुध नहीं ली है, जो बेहद चिंताजनक है।

उन्होंने कहा कि जीवीके कंपनी से प्रभावित 14 ग्राम सभाओं की महिलाएं वर्ष 2003 से अपने पुनर्वास और उचित मुआवजे की मांग को लेकर संघर्ष कर रही हैं। करीब दो दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद प्रभावित परिवारों की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की ओर से इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।



धरने पर बैठी महिलाओं ने कहा कि वे अपने अधिकारों और परिवारों के भविष्य की सुरक्षा के लिए आंदोलन कर रही हैं। महिलाओं ने बताया कि करवा चौथ के अवसर पर भी वे धरना स्थल नहीं छोड़ेंगी और वहीं अपना व्रत खोलेंगी। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे अपने संघर्ष को जारी रखेंगी।


वहीं, प्रभावित महिलाओं के समर्थन में पहुंचीं सरस्वती नेगी ने शासन और प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने कहा कि महिलाओं की समस्याओं का समाधान करने के लिए संबंधित अधिकारियों को तत्काल पहल करनी चाहिए। आंदोलनकारी महिलाओं ने भी पुनर्वास, मुआवजे और आरोपित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग दोहराई है। फिलहाल महिलाओं का क्रमिक अनशन जारी है और वे प्रशासन से ठोस कार्रवाई की अपेक्षा कर रही हैं।

