किच्छा में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया करवा चौथ पर्व, सुहागिनों ने पति की लंबी उम्र के लिए रखा निर्जला व्रत

किच्छा में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया करवा चौथ पर्व, सुहागिनों ने पति की लंबी उम्र के लिए रखा निर्जला व्रत

स्थान : किच्छा
ब्यूरो रिपोर्ट

पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना के साथ किच्छा में सुहागिन महिलाओं ने करवा चौथ का पर्व श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया। महिलाओं ने पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर अपने पति की दीर्घायु की कामना की। इस दौरान शहर के मंदिरों और घरों में पूजा-अर्चना का दौर चलता रहा।

करवा चौथ के अवसर पर महिलाओं ने सुबह से ही व्रत की तैयारियां शुरू कर दी थीं। सुहागिन महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर सोलह शृंगार किया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान महिलाओं में पर्व को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला।

किच्छा के विभिन्न मंदिरों में महिलाओं ने पहुंचकर भगवान की आराधना की और अपने पति की लंबी उम्र के साथ परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना की। महिलाओं ने धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए करवा चौथ की पूजा संपन्न की।

करवा चौथ का पर्व भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इसी आस्था के साथ किच्छा में भी महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया।

दिनभर व्रत रखने के बाद महिलाओं ने शाम के समय चंद्रमा के दर्शन का इंतजार किया। चंद्रमा निकलने पर महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा की और जल अर्पित कर अर्घ्य दिया। इस दौरान महिलाओं ने अपने पति के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की।

चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद महिलाओं ने पारंपरिक रीति के अनुसार अपने पति के दर्शन किए। इसके बाद पतियों ने अपनी पत्नियों को जल पिलाकर उनका व्रत खुलवाया। इस अवसर पर परिवारों में खुशी और उत्साह का माहौल देखने को मिला।

करवा चौथ के अवसर पर महिलाओं ने एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं। घरों में भी विशेष पूजा-अर्चना की गई। सुहागिन महिलाओं ने कहा कि करवा चौथ केवल एक व्रत नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच अटूट प्रेम, विश्वास और पारिवारिक रिश्तों को मजबूत बनाने वाली परंपरा है।

वहीं, किच्छा में करवा चौथ पर्व को लेकर दिनभर उत्सव जैसा वातावरण बना रहा। पारंपरिक परिधानों और सोलह शृंगार में सजी महिलाओं ने पूरे श्रद्धाभाव के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए। चंद्रमा की पूजा और व्रत पारण के साथ करवा चौथ का पर्व आस्था, प्रेम और पारिवारिक खुशहाली के संदेश के साथ संपन्न हुआ।