
स्थान : हल्द्वानी
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाने की मांग को लेकर हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में पहाड़ी आर्मी ने अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। मंगलवार, 27 अक्टूबर को संगठन की ओर से आयोजित ‘जनता कैबिनेट’ की सांकेतिक बैठक में तीन महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। इस दौरान पहाड़ी आर्मी के संस्थापक अध्यक्ष हरीश रावत ने सांकेतिक मुख्यमंत्री की भूमिका निभाई, जबकि संगठन के अन्य पदाधिकारियों ने कैबिनेट मंत्रियों के रूप में भाग लिया। बैठक में गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने, अंकिता भंडारी हत्याकांड में चर्चित कथित वीआईपी की भूमिका की जांच कराने और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) में संशोधन कर लिव-इन रिलेशनशिप को दी गई कानूनी मान्यता समाप्त करने की मांग उठाई गई।

जनता कैबिनेट की बैठक में सबसे पहले गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी घोषित करने का प्रस्ताव रखा गया। इस पर सांकेतिक मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों ने सहमति जताई और प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया। संगठन के संस्थापक अध्यक्ष हरीश रावत ने कहा कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाना उत्तराखंड की अस्मिता और राज्य आंदोलन की भावनाओं से जुड़ा विषय है। संगठन ने इस प्रस्ताव को विधानसभा अध्यक्ष के पास मंजूरी के लिए भेजने का निर्णय लिया।




अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका की जांच की मांग

बैठक में दूसरा महत्वपूर्ण प्रस्ताव अंकिता भंडारी हत्याकांड से संबंधित रहा। जनता कैबिनेट ने प्रकरण में लंबे समय से चर्चा में रहे कथित वीआईपी की भूमिका की जांच कराने की मांग का प्रस्ताव पारित किया। संगठन के पदाधिकारियों ने मामले में पारदर्शी जांच और सभी तथ्यों को सामने लाने की आवश्यकता जताई। हालांकि, यह सांकेतिक कैबिनेट का प्रस्ताव था, किसी सरकारी जांच एजेंसी को जारी किया गया आधिकारिक आदेश नहीं।


यूसीसी में संशोधन कर लिव-इन रिलेशनशिप की मान्यता समाप्त करने का प्रस्ताव
तीसरे प्रस्ताव में उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता कानून में संशोधन की मांग की गई। जनता कैबिनेट ने लिव-इन रिलेशनशिप को दी गई कानूनी मान्यता समाप्त करने के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया। संगठन ने इस विषय पर कानून में बदलाव की आवश्यकता जताई। यह प्रस्ताव भी सांकेतिक था और इससे मौजूदा कानून में कोई बदलाव नहीं हुआ है।




पहाड़ी आर्मी के संस्थापक अध्यक्ष हरीश रावत ने कहा कि जनता कैबिनेट में पारित किए गए प्रस्ताव पहाड़ की जनता की भावनाओं को सामने रखने का प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग राज्य आंदोलन से जुड़ी हुई है और इस मुद्दे पर संगठन अपना संघर्ष जारी रखेगा।

सांकेतिक मंत्रिमंडल में पदाधिकारियों को सौंपी गई जिम्मेदारियां
जनता कैबिनेट में हरीश रावत ने मुख्यमंत्री, कार्तिक उपाध्याय ने वित्त मंत्री, राजेंद्र कांडपाल ने शहरी विकास मंत्री, संतोष नेगी ने परिवहन एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री, भुवन पांडेय ने वन एवं भाषा मंत्री और युवराज सिंह चिराल ने शिक्षा मंत्री की भूमिका निभाई।
इसके अलावा मोहन कांडपाल को अल्पसंख्यक, उच्च शिक्षा एवं समाज कल्याण, कुसुमलता बौड़ाई को महिला कल्याण एवं खेल, आनंद कन्याल को पशुपालन एवं मत्स्य पालन, तारा दत्त पांडेय को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, भुवन जोशी को पर्यटन तथा नारायण बिष्ट को पंचायती विभाग की सांकेतिक जिम्मेदारी दी गई। पूर्व आईएएस अधिकारी विनोद प्रसाद रतूड़ी ने गोपन सचिव की भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पहाड़ी आर्मी के कार्यकर्ता मौजूद रहे। इनमें प्रेमा मेर, कविता जीना, राज्य आंदोलनकारी गोपाल दत्त कुमेड़ी, नीमा भट्ट, अंजू पांडे, कमलेश खंडूरी, प्रदीप रौतेला, रेखा बिष्ट, संजय बिष्ट, मोहन चंद्र पाटनी और राजेंद्र प्रसाद जोशी सहित अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शामिल रहे।
पहाड़ी आर्मी की इस सांकेतिक जनता कैबिनेट ने एक बार फिर गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को चर्चा में ला दिया है। संगठन ने राजधानी के मुद्दे के साथ ही अंकिता भंडारी हत्याकांड और यूसीसी में संशोधन को लेकर भी अपनी मांगें सामने रखी हैं। हालांकि, बैठक में पारित प्रस्तावों का कोई संवैधानिक या सरकारी प्रभाव नहीं है। इन पर किसी भी प्रकार का आधिकारिक निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकारियों द्वारा ही लिया जा सकता है।

