
स्थान :-चमोली

ब्यूरो रिपोर्ट
उत्तराखंड की चमोली पुलिस ने एक बार फिर अपनी मुस्तैदी और मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए सराहनीय कार्य किया है। थाना थराली क्षेत्र से विगत कई दिनों से लापता चल रही एक नाबालिग बालिका को पुलिस टीम ने कड़ी मशक्कत और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर देहरादून से सकुशल बरामद करने में सफलता हासिल की है। बालिका के सुरक्षित मिलने पर परिजनों ने पुलिस प्रशासन का हृदय से आभार व्यक्त किया है।



प्राप्त जानकारी के अनुसार, गत 07 अक्टूबर 2026 को पीड़िता के पिता (वादी) द्वारा थाना थराली में एक लिखित तहरीर दी गई थी। तहरीर में बताया गया था कि उनकी नाबालिग पुत्री बीते 01 अक्टूबर 2026 को रोज़ाना की तरह अपने घर से कॉलेज के लिए निकली थी, लेकिन देर शाम तक वापस लौटकर घर नहीं पहुँची। परिजनों ने अपने स्तर से रिश्तेदारों व संभावित स्थानों पर उसकी काफी खोजबीन की, परंतु बालिका का कोई अता-पता नहीं चल सका।

परिजनों की तहरीर के आधार पर थराली पुलिस ने बिना किसी विलंब के मु0अ0सं0 32/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2) के अंतर्गत मामला पंजीकृत किया। चूंकि मामला एक नाबालिग बालिका के गायब होने से जुड़ा था, इसलिए प्रकरण की अत्यधिक संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस उच्चाधिकारियों के निर्देशों पर थराली पुलिस तुरंत हरकत में आई और बालिका की तलाश के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया।


नाबालिग की शीघ्र बरामदगी के लिए थाना थराली से उपनिरीक्षक देवेन्द्र कुमार भारती के कुशल नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने मामले को सुलझाने के लिए विशेष ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की मदद ली। एसओजी की तकनीकी सहायता से गुमशुदा बालिका के मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) निकाल कर उसकी सटीक लोकेशन का निरंतर विश्लेषण किया गया और सुरागरसी-पतारसी की कार्रवाई को तेजी से आगे बढ़ाया गया।
पुलिस टीम की लगातार निगरानी, सटीक सूचना प्रणाली और अथक प्रयासों का ही परिणाम रहा कि 23 अक्टूबर 2026 को पुलिस टीम ने बालिका की लोकेशन ट्रैक करते हुए उसे देहरादून क्षेत्र से सुरक्षित ढूंढ निकाला। पुलिस की इस तत्परता के कारण एक अनहोनी की आशंका टल गई और लापता बालिका को सही-सलामत बचा लिया गया।




बालिका को थराली लाने के बाद नियमानुसार बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया तथा आवश्यक वैधानिक व चिकित्सकीय प्रक्रियाओं को पूरा किया गया। सभी कानूनी औपचारिकताएं पूर्ण करने के उपरांत बालिका को सुरक्षित एवं सकुशल उसके रोते-बिलखते परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। अपनी बेटी को सही-सलामत वापस पाकर परिजनों के चेहरे पर खुशी लौट आई।

इस सफल एवं संवेदनशील ऑपरेशन को अंजाम देने वाली पुलिस टीम में थाना थराली के उपनिरीक्षक देवेन्द्र कुमार भारती मुख्य भूमिका में रहे। उनके साथ एसओजी के कांस्टेबल आशुतोष तिवारी एवं कांस्टेबल रजत ने तकनीकी व मैदानी जांच में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। वहीं बालिका की सुरक्षा एवं देखभाल के लिए महिला होमगार्ड शिवानी जोशी भी टीम का हिस्सा रहीं।
चमोली पुलिस की इस सफलता और त्वरित कार्यप्रणाली की स्थानीय जनता तथा वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा भूरि-भूरि प्रशंसा की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि महिलाओं और नाबालिग बच्चों की सुरक्षा चमोली पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस प्रकार के मामलों में भविष्य में भी इसी प्रकार त्वरित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

