
ब्यूरो रिपोर्ट

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। सुरक्षा खतरों को देखते हुए अमेरिका ने मध्य पूर्व के चार देशों—जॉर्डन, लेबनान, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE)—स्थित अपने राजनयिक मिशनों में कर्मचारियों की संख्या घटाई है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान समझौते के लिए तैयार नहीं होता, तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई कर सकता है।

खुफिया रिपोर्ट के बाद सुरक्षा बढ़ाई
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया विभाग ने विदेशों में अमेरिकी नागरिकों और सैन्य कर्मियों को निशाना बनाए जाने की संभावित साजिशों को लेकर चेतावनी दी है। राष्ट्रीय खुफिया निदेशक जे क्लेटन ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को मेमो भेजकर इन खतरों से अवगत कराया। इसकी एक प्रति सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ को भी भेजे जाने की बात कही गई है।



सुरक्षा व्यवस्था के तहत संबंधित अमेरिकी मिशनों में कर्मचारियों की संख्या कम की गई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन दूतावासों का संचालन प्रतिबंधों के साथ जारी रहने की बात कही गई है।


सऊदी अरब और समुद्री मार्गों पर भी चिंता
क्षेत्रीय तनाव के बीच सऊदी अरब में भी सुरक्षा उपाय किए गए हैं। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमलों के खतरे के मद्देनजर गैर-जरूरी अमेरिकी कर्मचारियों और उनके परिवारों को लेकर पहले भी कदम उठाए गए थे।


वहीं, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंता बढ़ी है। इस समुद्री मार्ग से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यहां किसी भी तरह का सैन्य टकराव या जहाजों की आवाजाही में बाधा अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकती है।
ट्रंप ने सैन्य विकल्प खुला रखा

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा में एक रैली के दौरान ईरान को समझौता करने की चेतावनी दी और एक अन्य सैन्य अभियान की संभावना से इनकार नहीं किया। उनके बयान से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है।



हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि दूतावासों में कर्मचारियों की कटौती को किसी नए अमेरिकी या इजरायली हमले की तैयारी के बजाय सुरक्षा चिंताओं से जुड़ा कदम बताया गया है।
फिलहाल, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का अगला रुख कूटनीतिक बातचीत, क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति और दोनों देशों के आगामी फैसलों पर निर्भर करेगा।

