लोहाघाट में 12 गांवों के देवडांगरों ने किया पर्व स्नान, ऋषेश्वर मंदिर में उमड़े श्रद्धालु

लोहाघाट में 12 गांवों के देवडांगरों ने किया पर्व स्नान, ऋषेश्वर मंदिर में उमड़े श्रद्धालु

स्थान : लोहाघाट( चंपावत)
ब्यूरो रिपोर्ट

शारदीय नवरात्र की अष्टमी पर्व पर सोमवार को लोहाघाट में आस्था और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। क्षेत्र के 12 गांवों से पहुंचे देवडांगरों ने ऋषेश्वर मंदिर के समीप लोहावती नदी में विधि-विधान के साथ पर्व स्नान किया। इस दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा क्षेत्र भोलेनाथ के जयकारों से गूंज उठा।

पर्व स्नान के लिए क्षेत्र के विभिन्न गांवों से देवडांगरों के जत्थे पारंपरिक वाद्य यंत्रों ढोल-नगाड़ों के साथ ऋषेश्वर मंदिर पहुंचे। इस धार्मिक आयोजन में सिरमोली, कलीगांव, बनीगांव, राइकोट, डेंसली, रायनगर चौड़ी, बंदेलाढेक, कोलीढेक, तल्ला खतेड़ा, इड़ाकोट, भुमलाई और गंगनौला गांवों के देवडांगरों ने भाग लिया।

ऋषेश्वर मंदिर पहुंचने के बाद देवडांगरों ने लोहावती नदी में पर्व स्नान किया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्र के दौरान आयोजित इस परंपरा का क्षेत्र में विशेष महत्व है। देवडांगरों के पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया।

देवडांगरों के जत्थों के पीछे बड़ी संख्या में महिलाएं और भक्तगण भी चल रहे थे। इस दौरान श्रद्धालु भोलेनाथ के जयकारे लगाते हुए मंदिर पहुंचे। ढोल-नगाड़ों की गूंज और भक्तिमय माहौल ने आयोजन को विशेष बना दिया। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुए इस कार्यक्रम में लोगों की आस्था देखते ही बन रही थी।

पर्व स्नान के बाद 12 गांवों से आए देवडांगरों ने ऋषेश्वर मंदिर में पहुंचे भक्तों को आशीर्वाद दिया। श्रद्धालुओं ने देवडांगरों के दर्शन कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। इस दौरान मंदिर परिसर में दिनभर धार्मिक गतिविधियां चलती रहीं।

शारदीय नवरात्र की अष्टमी पर आयोजित इस धार्मिक आयोजन में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह परंपरा क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी हुई है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से गांवों की पारंपरिक मान्यताओं और रीति-रिवाजों को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।

लोहाघाट में ऋषेश्वर मंदिर के समीप आयोजित पर्व स्नान के दौरान 12 गांवों के देवडांगरों की सहभागिता ने आयोजन को खास बना दिया। ढोल-नगाड़ों, जयकारों और भक्तों की मौजूदगी के बीच संपन्न हुए इस कार्यक्रम से पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना रहा।