10 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद होंगे गंगोत्री धाम के कपाट, शुभ मुहूर्त तय

10 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद होंगे गंगोत्री धाम के कपाट, शुभ मुहूर्त तय

स्थान : उत्तरकाशी
ब्यूरो रिपोर्ट

विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने की तिथि और शुभ मुहूर्त निर्धारित कर लिया गया है। शारदीय नवरात्र की नवमी के पावन अवसर पर श्री 5 मंदिर समिति, गंगोत्री धाम के पुरोहितों ने विधि-विधान के साथ कपाट बंद होने का मुहूर्त निकाला। समिति की ओर से जारी पत्र के अनुसार, आगामी 10 नवंबर 2026 को अन्नकूट पर्व के अवसर पर दोपहर 12 बजकर 5 मिनट पर गंगोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे।

कपाट बंद होने की तिथि तय होने के साथ ही चारधाम यात्रा के प्रमुख धामों में शामिल गंगोत्री में शीतकालीन व्यवस्थाओं की तैयारियां भी महत्वपूर्ण हो गई हैं। हर वर्ष परंपरानुसार निर्धारित शुभ मुहूर्त में पूजा-अर्चना के बाद धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद किए जाते हैं। इसके बाद उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित मंदिर में नियमित दर्शन की प्रक्रिया शीतकाल के लिए स्थगित हो जाती है।

कपाट बंद होने के बाद मां गंगा की उत्सव डोली शीतकालीन प्रवास के लिए मुखबा गांव पहुंचेगी। मुखबा को मां गंगा का शीतकालीन प्रवास स्थल माना जाता है। यहां शीतकाल के दौरान श्रद्धालु मां गंगा के दर्शन कर सकेंगे और धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना कर सकेंगे।

गंगोत्री धाम में हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां गंगा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यात्रा सीजन के दौरान धाम में भक्तों की आवाजाही बनी रहती है। श्रद्धालु गंगा के उद्गम क्षेत्र के दर्शन के साथ मंदिर में पूजा-अर्चना कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। कपाट बंद होने की तिथि घोषित होने के बाद अब श्रद्धालुओं के पास निर्धारित समय तक धाम के दर्शन करने का अवसर रहेगा।

शीतकाल के आगमन के साथ ही गंगोत्री क्षेत्र में तापमान में गिरावट आने लगती है। ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में ठंड बढ़ने और बर्फबारी की संभावना को देखते हुए सर्दियों के दौरान यात्रा और आवागमन कठिन हो जाता है। इसी कारण परंपरानुसार चारधाम के मंदिरों के कपाट निर्धारित तिथियों और शुभ मुहूर्त में शीतकाल के लिए बंद किए जाते हैं।

गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद मां गंगा की पूजा-अर्चना मुखबा गांव में जारी रहेगी। इससे शीतकाल के दौरान भी श्रद्धालुओं को मां गंगा के दर्शन का अवसर मिलेगा। धार्मिक मान्यताओं और सदियों से चली आ रही परंपराओं के अनुसार मां गंगा की उत्सव डोली का शीतकालीन प्रवास विशेष महत्व रखता है।

10 नवंबर को होने वाली कपाट बंदी के साथ ही गंगोत्री धाम में इस वर्ष की यात्रा का समापन हो जाएगा। अब श्रद्धालुओं की नजर कपाट बंद होने के दिन होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों और मां गंगा की उत्सव डोली के मुखबा प्रस्थान पर रहेगी। शीतकाल के दौरान श्रद्धालु मुखबा पहुंचकर मां गंगा के दर्शन कर सकेंगे।