
स्थान – सितारगंज/ऊधम सिंह नगर
रिपोर्टर – तनवीर अंसारी

सितारगंज में सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर लोक निर्माण विभाग (PWD) एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्राम थारू तीसौर के कैलाशपुरी से गगनपुर तक करीब 78 लाख रुपये की लागत वाली सड़क ढाई महीने में ही उखड़ने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है। सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है और उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग उठाई है।

ग्रामीणों ने अधिशासी अभियंता को सौंपा ज्ञापन



सड़क की खराब हालत से नाराज ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता नीरज अग्रवाल को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री की जांच कराने और सड़क का दोबारा निर्माण कराने की मांग की। उनका कहना है कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क की हालत इतनी खराब हो गई है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।


घटिया निर्माण सामग्री इस्तेमाल करने का आरोप


ग्रामीण विशाल सिंह गंगा सागर ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया, जिसके चलते सड़क कुछ ही समय में उखड़ने लगी। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप किया गया होता तो सड़क इतनी जल्दी खराब नहीं होती। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
सवाल उठाने पर मुकदमे की धमकी का आरोप




ग्रामीण विशाल सिंह गंगा सागर ने सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठाने के बाद मुकदमा दर्ज कराने की धमकी मिलने का आरोप भी लगाया है। इस आरोप के सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जनहित से जुड़े निर्माण कार्यों में गुणवत्ता पर सवाल उठाना उनका अधिकार है और शिकायतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
PWD ने बारिश को बताया पैचवर्क उखड़ने की वजह

वहीं, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता नीरज अग्रवाल ने बताया कि संबंधित सड़क पर पैचवर्क का टेंडर स्वीकृत हुआ था। उनके अनुसार, बारिश के कारण पैचवर्क उखड़ गया है, जिसे जल्द ठीक कराया जाएगा। विभाग की ओर से सड़क को दुरुस्त कराने का आश्वासन दिया गया है। हालांकि, ग्रामीणों की ओर से उठाए गए गुणवत्ता संबंधी सवालों पर जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
जांच में खामी मिली तो ठेकेदार पर होगी कार्रवाई
मामले को लेकर खटीमा के एसडीएम तुषार सैनी ने कहा कि यदि जांच में सड़क निर्माण की गुणवत्ता खराब पाई जाती है तो संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने मुकदमे की धमकी दिए जाने के आरोप की भी जांच कराने की बात कही। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद अब ग्रामीणों को जांच और कार्रवाई का इंतजार है।
78 लाख रुपये की सड़क ढाई महीने में कैसे हुई खराब?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि करीब 78 लाख रुपये की लागत वाली सड़क इतनी कम अवधि में कैसे उखड़ने लगी। क्या निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया या फिर बारिश के कारण पैचवर्क खराब हुआ? इन सवालों का जवाब तकनीकी जांच के बाद ही मिल सकेगा। ग्रामीणों ने सड़क की वास्तविक स्थिति की जांच कराकर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
जांच रिपोर्ट पर टिकी ग्रामीणों की निगाहें

फिलहाल सड़क निर्माण की गुणवत्ता और मुकदमे की धमकी के आरोपों की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविकता सामने आएगी। ग्रामीणों ने सड़क की मरम्मत के बजाय आवश्यकतानुसार पुनर्निर्माण कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और लोक निर्माण विभाग सड़क को दुरुस्त कराने के लिए क्या कदम उठाता है।

