
स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के विरोध में उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने गांधी पार्क में महात्मा गांधी की प्रतिमा के नीचे मौन उपवास रखा। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए नियुक्ति रद्द करने की मांग की। कांग्रेस ने इस मुद्दे को उत्तराखंड की जनभावनाओं से जोड़ते हुए विरोध जारी रखने की बात कही।

गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाए जाने का फैसला अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े मामले को लेकर प्रदेश में उठ रहे सवालों के बीच आया है। उन्होंने कहा कि इस नियुक्ति से उत्तराखंड की जनता की भावनाएं आहत हुई हैं। हालांकि, दुष्यंत गौतम की इस मामले में संलिप्तता संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।



कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सीबीआई जांच का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि संवैधानिक पद देकर संबंधित व्यक्ति को संभावित कानूनी कार्रवाई से बचाने का प्रयास किया जा रहा है। यह उनका आरोप है, जिसकी पुष्टि के लिए संबंधित जांच के निष्कर्षों और आधिकारिक तथ्यों को देखना आवश्यक है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए गोदियाल ने कहा कि उत्तराखंड के प्रति सरकार के दावों और इस फैसले के बीच विरोधाभास दिखाई देता है। उनके अनुसार, इस नियुक्ति से प्रदेश के लोगों में नाराजगी है और सरकार को जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।


गोदियाल ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा के कई नेताओं से जुड़े राज दुष्यंत गौतम के पास होने के कारण उन्हें बचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने इस आरोप के समर्थन में कोई स्वतंत्र रूप से सत्यापित प्रमाण प्रस्तुत किए जाने का विवरण नहीं दिया। भाजपा या केंद्र सरकार का इस आरोप पर पक्ष सामने आने पर मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने उत्तराखंड और सिक्किम की जनता से नियुक्ति रद्द होने तक इस फैसले के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े सवालों पर निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।



गांधी पार्क में आयोजित मौन उपवास के जरिए कांग्रेस ने राज्यपाल की नियुक्ति को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया। पार्टी का कहना है कि उत्तराखंड की जनता की भावनाओं और अंकिता भंडारी प्रकरण से जुड़े सवालों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

इस घटनाक्रम के बीच दुष्यंत गौतम की नियुक्ति को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। मामले में लगाए गए आरोपों, जांच से जुड़े आधिकारिक तथ्यों और केंद्र सरकार के पक्ष को अलग-अलग देखना महत्वपूर्ण होगा, ताकि राजनीतिक दावों और प्रमाणित तथ्यों के बीच स्पष्ट अंतर रखा जा सके।

