एम्स ऋषिकेश में आरक्षण को लेकर नर्सिंग अधिकारियों का विरोध, आंदोलन की दी चेतावनी

एम्स ऋषिकेश में आरक्षण को लेकर नर्सिंग अधिकारियों का विरोध, आंदोलन की दी चेतावनी

स्थान : ऋषिकेश
ब्यूरो रिपोर्ट

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में आरक्षण और रोस्टर प्रणाली को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। नर्सिंग अधिकारियों ने एम्स निदेशक और प्रबंधन पर आरक्षण के नियमों की अनदेखी करने तथा रोस्टर प्रणाली का पालन नहीं करने का आरोप लगाया है। अपनी मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज नर्सिंग अधिकारियों ने संस्थान प्रशासन के खिलाफ आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।

नर्सिंग अधिकारी बीरबल सिंह मीणा ने बताया कि बीते दिन नर्सिंग अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने एम्स ऋषिकेश की निदेशक और प्रबंधन से मुलाकात की थी। इस दौरान अधिकारियों ने रोस्टर प्रणाली के अनुसार आरक्षण का लाभ दिए जाने और पदोन्नति से संबंधित समस्याओं के समाधान की मांग उठाई थी। उनका आरोप है कि वार्ता के बावजूद प्रबंधन ने उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

बीरबल सिंह मीणा ने कहा कि नर्सिंग अधिकारी लंबे समय से अपने अधिकारों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन संस्थान प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि रोस्टर प्रणाली का उचित पालन नहीं होने के कारण पात्र कर्मचारियों को आरक्षण और पदोन्नति से संबंधित लाभ नहीं मिल पा रहे हैं।

नर्सिंग अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि एम्स प्रशासन ने उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी और अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखा जाएगा।

वहीं, नर्सिंग अधिकारी सविता मोहन ने एम्स ऋषिकेश प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि संस्थान में उनके साथ जातिगत भेदभाव किया जा रहा है। सविता मोहन ने कहा कि आरक्षण और पदोन्नति से जुड़े अधिकारों से उन्हें वंचित किया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है।

सविता मोहन ने एम्स के सुरक्षा कर्मियों पर मारपीट करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनके साथ कथित तौर पर अनुचित व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने संस्थान की निदेशक और प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए संबंधित आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की आवश्यकता जताई।

नर्सिंग अधिकारियों का कहना है कि संस्थान में नियमानुसार आरक्षण और रोस्टर प्रणाली का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि पदोन्नति की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाए और पात्र कर्मचारियों को उनके अधिकारों के अनुरूप लाभ दिए जाएं। साथ ही कर्मचारियों की शिकायतों पर गंभीरता से विचार कर उचित कार्रवाई की जाए।

फिलहाल नर्सिंग अधिकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों पर एम्स ऋषिकेश प्रबंधन का पक्ष सामने नहीं आया है। जातिगत भेदभाव, मारपीट और आरक्षण संबंधी अनियमितताओं के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है। वहीं, नर्सिंग अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांगों का समाधान नहीं होने पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में एम्स प्रशासन और नर्सिंग अधिकारियों के बीच विवाद बढ़ सकता है।