
स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

देशभर में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) को लेकर सियासी घमासान जारी है। विपक्ष लगातार केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और कथित वोट चोरी के आरोपों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। वहीं भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए एसआईआर प्रक्रिया का बचाव किया है।

एसआईआर को लेकर विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के दौरान गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। विपक्ष चुनाव आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर भी सवाल उठा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शनों की बात भी सामने आई है।


इस पूरे मामले पर भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता अनुकृति गुसाईं ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि एसआईआर को लेकर जनता के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को सही और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से पुनरीक्षण की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।


अनुकृति गुसाईं ने कहा कि मतदाता सूची में ऐसे लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं, जिनके नाम दो अलग-अलग स्थानों पर दर्ज हैं। इसके अलावा जिन मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है या जिनके नाम और विवरण में गड़बड़ी पाई गई है, उनके रिकॉर्ड का भी पुनरीक्षण किया जा रहा है।


भाजपा प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में नहीं है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत फॉर्म-6 भरकर अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकता है। उन्होंने कहा कि पात्र मतदाताओं को अपने मताधिकार से वंचित नहीं होना चाहिए।

उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया को राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है। अनुकृति गुसाईं के अनुसार, विपक्ष एसआईआर को लेकर भ्रामक प्रचार कर रहा है और लोगों के बीच गलत संदेश पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।



दूसरी ओर, विपक्षी दल मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान किसी भी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से नहीं हटाया जाना चाहिए।
फिलहाल एसआईआर को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। भाजपा जहां इसे मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया बता रही है, वहीं विपक्ष इसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। ऐसे में मतदाता सूची की शुद्धता, पात्र मतदाताओं के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है।

