
स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

टोंस नदी पर प्रस्तावित किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर प्रभावित क्षेत्रों में विरोध तेज हो गया है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने महापंचायत कर अपनी जमीन, आजीविका और पुनर्वास से जुड़ी चिंताएं सामने रखीं। विरोध प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी भागीदारी की।

ग्रामीणों ने परियोजना के प्रस्तावित स्वरूप और बांध स्थल को लेकर आपत्ति जताई है। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक महापंचायत में कुछ ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे परियोजना के सिद्धांततः विरोधी नहीं हैं, लेकिन वर्तमान प्रस्तावित स्थल और बांध की ऊंचाई को लेकर उनकी गंभीर आपत्तियां हैं।



किशाऊ परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए 15 सितंबर को उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के बीच समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। प्रस्तावित बांध टोंस नदी पर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा क्षेत्र में बनाया जाना है।

केंद्र सरकार के मुताबिक परियोजना से करीब 97 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने का अनुमान है। इसके साथ ही परियोजना से 1,476 मिलियन यूनिट जलविद्युत उत्पादन का भी लक्ष्य रखा गया है। प्रस्तावित बांध की ऊंचाई 232.6 मीटर और जल भंडारण क्षमता 1,562 मिलियन घन मीटर बताई गई है।



वहीं प्रभावित ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता अपनी पुश्तैनी जमीन, घर और आजीविका को लेकर है। उपलब्ध परियोजना आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कई गांव प्रभावित होने हैं और हजारों लोगों के पुनर्वास की आवश्यकता पड़ सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले प्रभावित परिवारों के सामने पुनर्वास, मुआवजा, जमीन और रोजगार से जुड़ी पूरी व्यवस्था स्पष्ट होनी चाहिए। उनका आरोप है कि इन मुद्दों पर अभी तक उन्हें संतोषजनक और स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है।



महापंचायत में ग्रामीणों ने परियोजना क्षेत्र का नए सिरे से सर्वे कराने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि ऐसे विकल्पों का अध्ययन किया जाना चाहिए, जिससे आबादी, कृषि भूमि और स्थानीय आजीविका पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।
ग्रामीणों ने प्रभावित परिवारों के लिए पारदर्शी पुनर्वास नीति तय करने और निर्णय प्रक्रिया में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की है। आंदोलन से जुड़े लोगों ने कहा कि उनकी मांगों पर स्पष्ट निर्णय होने तक विरोध जारी रखा जाएगा।
एक ओर केंद्र और सहभागी राज्य सरकारें किशाऊ परियोजना को सिंचाई, पेयजल और बिजली की जरूरतों से जुड़ी महत्वपूर्ण बहुउद्देशीय परियोजना बता रही हैं, वहीं प्रभावित ग्रामीण जमीन, पुनर्वास और आजीविका की सुरक्षा की गारंटी मांग रहे हैं। ऐसे में परियोजना को आगे बढ़ाने के साथ सरकार, परियोजना प्रबंधन और प्रभावित गांवों के बीच संवाद महत्वपूर्ण हो गया है।

