
स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के मामले में एसआईटी को एक और कामयाबी मिली है। पुलिस ने मध्य प्रदेश के भोपाल निवासी धीरज कुमार श्रीवास्तव (37) को गिरफ्तार किया है। इस मामले में अब तक तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

पुलिस के मुताबिक मामला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित श्रेणी के कथित फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कर उनके आधार पर एमबीबीएस में दाखिला दिलाने से जुड़ा है। इस संबंध में 13 सितंबर को रायपुर और क्लेमेनटाउन थानों में मुकदमे दर्ज किए गए थे।


एसएसपी देहरादून प्रमेन्द्र सिंह डोबाल की ओर से गठित एसआईटी लगातार मामले की जांच कर रही है। एसआईटी का नेतृत्व एसपी ग्रामीण जया बलोनी कर रही हैं और फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने से लेकर दाखिला कराने तक के पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगाली जा रही हैं।


जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी धीरज श्रीवास्तव भोपाल में मेडिकल और अन्य पाठ्यक्रमों में प्रवेश से जुड़े एक नेटवर्क से जुड़ा था। पुलिस के अनुसार उसके माध्यम से निजी विश्वविद्यालयों में एमबीबीएस के साथ बीटेक, बीसीए, बीबीए और बीकॉम जैसे पाठ्यक्रमों में कमीशन लेकर प्रवेश दिलाने की जानकारी भी सामने आई है।


पुलिस के मुताबिक आरोपी का संपर्क इस मामले में पहले गिरफ्तार किए जा चुके रूपेश पंडित से भी था। आरोप है कि अभ्यर्थियों के फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और उन्हें प्रवेश दिलाने के बदले कमीशन लिया जाता था।
एसआईटी ने धीरज श्रीवास्तव के कब्जे से 5.58 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। जांच में तीन अभ्यर्थियों के लिए कूटरचित दस्तावेज तैयार कर फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाए जाने की बात भी सामने आई है।



इससे पहले एसआईटी रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस के अनुसार रूपेश की निशानदेही पर उसके मेरठ स्थित घर से कथित रूप से फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने के एवज में लिए गए आठ लाख रुपये भी बरामद किए गए थे।
एसआईटी अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने और दाखिला दिलाने के इस कथित नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे। दस्तावेज तैयार करने, सत्यापन कराने और अभ्यर्थियों तक पहुंच बनाने वाले अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक जांच अभी जारी है और सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में मामले से जुड़े अन्य व्यक्तियों पर भी कानूनी शिकंजा कस सकता है।

