
स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड में पर्यटन और पर्वतीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने रोपवे परियोजनाओं पर काम तेज कर दिया है। पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल के अनुसार प्रदेश में करीब 50 रोपवे परियोजनाएं चिन्हित की गई हैं। इनमें केदारनाथ और हेमकुंड साहिब जैसी प्रमुख धार्मिक रोपवे परियोजनाएं भी शामिल हैं। प्रदेश में कुल करीब 160 किलोमीटर लंबे रोपवे नेटवर्क की योजना पर विभिन्न एजेंसियां काम कर रही हैं।

पर्यटन विभाग और नेशनल हाईवेज लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML) के बीच हुए समझौते के तहत चिन्हित परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। पर्यटन विभाग परियोजनाओं की पहचान कर उन्हें NHLML को सौंपेगा, जिसके बाद व्यवहार्यता अध्ययन, डीपीआर और आगे की निर्माण प्रक्रिया पूरी की जाएगी।


केदारनाथ और हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाओं को केंद्र सरकार की पर्वतमाला योजना के तहत मंजूरी मिल चुकी है। सोनप्रयाग से केदारनाथ तक प्रस्तावित रोपवे की लंबाई करीब 12.9 किलोमीटर है, जबकि गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक करीब 12.4 किलोमीटर का रोपवे प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं से कठिन पैदल यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है।


देहरादून से मसूरी के बीच पुरुकुल गांव से मसूरी लाइब्रेरी क्षेत्र तक करीब 5.2 किलोमीटर लंबे रोपवे का निर्माण भी जारी है। पर्यटन विभाग का लक्ष्य इस परियोजना को 2027 में पूरा करने का है। परियोजना पूरी होने पर देहरादून से मसूरी तक रोपवे से सफर करीब 15 से 20 मिनट में पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है।


कुमाऊं क्षेत्र में भी रोपवे कनेक्टिविटी बढ़ाने की योजना तैयार की गई है। पर्यटन सचिव के अनुसार हल्द्वानी-नैनीताल मार्ग और कैंची धाम में बढ़ती यात्री संख्या को देखते हुए पहले चरण में नैनीताल-ज्योलीकोट और ज्योलीकोट-हनुमानगढ़ी मार्ग को चिन्हित किया गया है। इसके बाद ज्योलीकोट से कैंची धाम तक रोपवे विकसित करने की योजना है।
पहले चरण के लिए संबंधित एजेंसी की ओर से डीपीआर तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि कैंची धाम तक प्रस्तावित अगले चरण की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पर काम जारी है। सरकार का उद्देश्य श्रद्धालुओं और पर्यटकों को वैकल्पिक परिवहन सुविधा देने के साथ नैनीताल और कैंची धाम मार्ग पर सड़क यातायात का दबाव कम करना है।



रानीबाग-नैनीताल रोपवे परियोजना के लिए भी भूमि चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। पहले एचएमटी फैक्टरी की भूमि पर विचार किया जा रहा था, लेकिन अब एचएमटी के निकट करीब 33 एकड़ वन भूमि चिह्नित की गई है। प्रस्तावित स्थल पर मुख्य स्टेशन के साथ यात्री सुविधाएं विकसित करने की योजना है और भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी है।
पर्यटन विभाग का मानना है कि रोपवे पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क परिवहन का प्रभावी विकल्प बन सकते हैं। इससे धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने के साथ यात्रा समय कम हो सकता है और पर्यटन सीजन के दौरान जाम की समस्या में भी राहत मिलने की संभावना है। राज्य सरकार ने केदारनाथ, हेमकुंड साहिब, रानीबाग-हनुमानगढ़ी-कैंची धाम और अन्य कई परियोजनाओं को प्राथमिकता सूची में रखा है।
प्रदेश में रोपवे नेटवर्क का विस्तार पर्यटन के साथ स्थानीय रोजगार और स्वरोजगार से भी जोड़ा जा रहा है। फिलहाल विभिन्न परियोजनाएं डीपीआर, भूमि चयन, निविदा और निर्माण के अलग-अलग चरणों में हैं। परियोजनाओं के पूरा होने पर उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थ और पर्यटन स्थलों तक पहुंच में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद जताई जा रही है।

