सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में देने की तैयारी का आरोप, कांग्रेस ने धामी सरकार को घेरा

सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में देने की तैयारी का आरोप, कांग्रेस ने धामी सरकार को घेरा

स्थान : चंपावत
ब्यूरो रिपोर्ट

कांग्रेस जिला अध्यक्ष चिराग फर्त्याल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश सरकार पर सरकारी भूमि एवं संपत्तियों को निजी हाथों में देने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड के माध्यम से प्रदेश की बहुमूल्य सरकारी जमीनों और संपत्तियों को लंबे समय के लिए निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी की जा रही है। हालांकि ये कांग्रेस नेता के आरोप हैं और सरकार की ओर से जॉर्ज एवरेस्ट मामले में पूर्व में निविदा प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप बताया गया है।

फर्त्याल ने आरोप लगाया कि प्रदेश में भूमि संबंधी व्यवस्थाओं के बाद अब सरकार की नजर विभिन्न सरकारी विभागों की कीमती जमीन और संपत्तियों पर है। उन्होंने कहा कि राज्य की संपत्तियां प्रदेश की जनता की हैं और इनका उपयोग जनहित को प्राथमिकता में रखकर किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार की पीपीपी और लीज संबंधी नीतियों पर भी सवाल उठाए।

कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने मसूरी के हाथीपांव स्थित जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट का उदाहरण देते हुए दावा किया कि करीब 142 एकड़ भूमि को राजस एरो स्पोर्ट्स एंड एडवेंचर प्राइवेट लिमिटेड को 15 वर्ष के लिए करीब एक करोड़ रुपये सालाना शुल्क पर दिया गया। उन्होंने जमीन का बाजार मूल्य करीब 30 हजार करोड़ रुपये होने का दावा करते हुए सौदे पर सवाल उठाए। जॉर्ज एवरेस्ट की 142 एकड़ संपत्ति 15 वर्ष के लिए उक्त कंपनी को दिए जाने और सालाना शुल्क एक करोड़ रुपये होने की जानकारी सार्वजनिक रिपोर्टों में भी सामने आ चुकी है।

फर्त्याल ने कहा कि जिस संपत्ति को निजी कंपनी को संचालन के लिए दिया गया, उसके विकास पर एशियाई विकास बैंक से लिए गए करीब 23 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। उनका आरोप है कि सरकार ने सार्वजनिक धन से संपत्ति को विकसित करने के बाद उससे मिलने वाले राजस्व की तुलना में बेहद कम राशि पर इसे निजी हाथों में दिया। उन्होंने इसे प्रदेश के आर्थिक हितों के विपरीत बताया।

उन्होंने निविदा प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसमें शामिल तीनों कंपनियों के बीच संबंध थे। फर्त्याल ने राजस एरो स्पोर्ट्स एंड एडवेंचर प्राइवेट लिमिटेड का संबंध आचार्य बालकृष्ण से होने की बात कही। इस मुद्दे पर पहले भी राजनीतिक विवाद हो चुका है। पर्यटन विभाग और मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से पूर्व में कहा गया है कि निविदा प्रक्रिया नियमों के अनुसार पूरी की गई और जॉर्ज एवरेस्ट की भूमि एवं संपत्तियों का स्वामित्व पर्यटन विभाग के पास ही है।

कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2023 में उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड से संबंधित कानून बनाया, जिसके जरिए सरकारी संपत्तियों को पीपीपी और अन्य माध्यमों से विकसित किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था का इस्तेमाल बहुमूल्य संपत्तियों को लंबे समय के लिए निजी कंपनियों को देने में किया जा सकता है। UIIDB की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार बोर्ड का गठन उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 2023 के तहत किया गया है और पीपीपी परियोजनाओं को बढ़ावा देना उसके उद्देश्यों में शामिल है।

फर्त्याल ने दावा किया कि लोक निर्माण विभाग के 25 निरीक्षण भवनों और पर्यटन विभाग की कुछ संपत्तियों को भी निजी क्षेत्र के माध्यम से संचालित करने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि इनमें कई संपत्तियां महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों पर स्थित हैं और इनकी कीमत करोड़ों से लेकर अरबों रुपये तक है। UIIDB की मौजूदा परियोजनाओं में सरकारी संपत्तियों के पीपीपी मॉडल पर पुनर्विकास से संबंधित निविदाएं भी शामिल हैं, जिनमें ऋषिकेश पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस के पुनर्विकास की परियोजना शामिल है।

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि निजी क्षेत्र को दिए जाने या पीपीपी मॉडल में विकसित किए जाने वाली संपत्तियों की सूची में पुरानी और ऐतिहासिक सरकारी संपत्तियां भी शामिल हो सकती हैं। उन्होंने हल्द्वानी के रानीबाग स्थित एचएमटी फैक्ट्री और चंपावत जिले के देवीधुरा क्षेत्र के डाक बंगले का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस ऐसी संपत्तियों के संबंध में सरकार के फैसलों पर नजर रखेगी और आवश्यकता पड़ने पर विरोध करेगी।

फर्त्याल ने कहा कि कांग्रेस प्रदेश की सरकारी संपत्तियों को लेकर सरकार की नीतियों का विधानसभा से लेकर सड़क तक विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि ये संपत्तियां उत्तराखंड की जनता की हैं और किसी राजनीतिक दल की नहीं। उन्होंने जनता से भी सरकारी भूमि और संपत्तियों से जुड़े निर्णयों के प्रति जागरूक रहने की अपील की। वहीं, जॉर्ज एवरेस्ट प्रकरण में राज्य सरकार और पर्यटन विभाग पहले ही अनियमितता के आरोपों को खारिज करते हुए आवंटन प्रक्रिया को नियमानुसार और पारदर्शी बता चुके हैं।