गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग तेज, हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में क्रमिक अनशन जारी

गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग तेज, हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में क्रमिक अनशन जारी

स्थान : हल्द्वानी
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाए जाने की मांग को लेकर हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में चल रहा अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन लगातार जोर पकड़ रहा है। बीते 18 अक्टूबर से जारी इस आंदोलन में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से राज्य आंदोलनकारी, पूर्व सैनिक और सामाजिक कार्यकर्ता पहुंचकर अपना समर्थन दे रहे हैं। आंदोलनकारियों ने गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित किए जाने तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया है।

क्रमिक अनशन में पहाड़ी आर्मी के जिलाध्यक्ष एवं पूर्व सैनिक राजेंद्र कांडपाल शामिल हुए। उन्होंने कहा कि 35 वर्षों तक भारतीय सेना में रहकर देश की सेवा करने के बाद अब वह उत्तराखंड राज्य के हितों और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करने निकले हैं। राज्य की वर्तमान स्थिति को देखकर मन में गहरा आक्रोश है और अब प्रदेशवासियों को अपने अधिकारों के लिए एकजुट होने की आवश्यकता है।

राजेंद्र कांडपाल ने कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान आंदोलनकारियों के साथ हुई बर्बरता की घटनाओं को सुनकर आज भी मन व्यथित हो उठता है। जिन सपनों और उम्मीदों के साथ अलग उत्तराखंड राज्य का निर्माण हुआ था, उन सपनों को साकार करने के लिए एक बार फिर व्यापक जनआंदोलन की आवश्यकता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से राजनीतिक और सामाजिक मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुट होने का आह्वान किया।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पूर्व आईएएस विनोद प्रसाद रतूड़ी ने बताया कि पिछले 19 दिनों से प्रदेश के विभिन्न जिलों और पर्वतीय क्षेत्रों से लोग हल्द्वानी के बुद्ध पार्क पहुंचकर क्रमिक अनशन में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन को लगातार व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। जिस तरह से पूर्व सैनिक, राज्य आंदोलनकारी, महिलाएं और सामाजिक संगठन इस अभियान से जुड़ रहे हैं, उससे विश्वास बढ़ रहा है कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने का संघर्ष अपने उद्देश्य में सफल होगा।

अनशन को समर्थन देने अल्मोड़ा जिले के मासी क्षेत्र से पहुंचे पूर्व सैनिक आनंद राम ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण पहाड़ के अस्तित्व, अस्मिता और संस्कृति की सुरक्षा के उद्देश्य से हुआ था। लेकिन राज्य गठन के वर्षों बाद भी स्थायी राजधानी का सवाल अधूरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों के विकास और पहाड़ की पहचान को सुरक्षित रखने के लिए गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाना बेहद जरूरी है।

आनंद राम ने कहा कि पहाड़ के खेत, किसान, गांव और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए अब ठोस निर्णय लेने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों और शहीदों ने जिस विकसित और आत्मनिर्भर पर्वतीय राज्य की कल्पना की थी, उसे साकार करना सभी की जिम्मेदारी है। गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाकर राज्य आंदोलन के शहीदों के सपनों को सम्मान दिया जाना चाहिए।

आंदोलन में शामिल वक्ताओं ने कहा कि गैरसैंण केवल राजधानी का मुद्दा नहीं, बल्कि पहाड़ की पहचान, रोजगार, पलायन और पर्वतीय क्षेत्रों के समग्र विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण सवाल है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों से लगातार हो रहे पलायन, रोजगार के सीमित अवसरों और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों पर भी व्यापक स्तर पर एकजुट होकर आवाज उठाने की आवश्यकता है।

आंदोलनकारियों ने प्रदेश के सभी वर्गों, विशेषकर युवाओं, महिलाओं, पूर्व सैनिकों और सामाजिक संगठनों से क्रमिक अनशन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि राज्य के विभिन्न हिस्सों से लोग हल्द्वानी पहुंचकर इस आंदोलन को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए व्यापक जनभागीदारी बेहद आवश्यक है।

इस दौरान प्रेमा मेर, नीमा भट्ट, अंजू पांडे, तारा पांडे, कविता जीना, देवेंद्र सालाकोट, रजत पाटनी, सुशील भट्ट, हेमंत साहू, पार्षद प्रीति आर्य, सीमा देवी, ललिता देवी, हिमानी पांडे, ज्योतिष्ण पांडे, उषा शर्मा और दीपक जोशी सहित सैकड़ों आंदोलनकारी मौजूद रहे। आंदोलनकारियों ने एक स्वर में गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी घोषित करने की मांग उठाते हुए संघर्ष को और व्यापक बनाने का संकल्प लिया।