
स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

अखिल भारतीय कायस्थ महासभा का दो दिवसीय कार्यक्रम सामाजिक एकता और संगठन को मजबूत बनाने के संकल्प के साथ संपन्न हो गया। कार्यक्रम के पहले दिन धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया, जबकि दूसरे और अंतिम दिन महासभा की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। इस दौरान कायस्थ समाज के विभिन्न पदाधिकारियों और सदस्यों ने समाज की वर्तमान स्थिति, संगठन की मजबूती और भविष्य की दिशा को लेकर विस्तार से चर्चा की।


कार्यक्रम के पहले दिन मां गंगा की आरती और भगवान चित्रगुप्त की कथा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महासभा से जुड़े पदाधिकारियों और समाज के लोगों ने धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया। भगवान चित्रगुप्त की कथा के माध्यम से समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकजुटता को भी बढ़ावा देना रहा।




वहीं कार्यक्रम के दूसरे और अंतिम दिन अखिल भारतीय कायस्थ महासभा की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक में महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद सुबोध कांत सहाय, प्रदेश अध्यक्ष, विभिन्न पदाधिकारी और बड़ी संख्या में संगठन से जुड़े सदस्य मौजूद रहे। करीब दो घंटे तक चली इस बैठक में संगठन की गतिविधियों और कायस्थ समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।



बैठक के दौरान महासभा के पदाधिकारियों ने अपने-अपने विचार रखे और संगठन को मजबूत बनाने के लिए आपसी सहयोग एवं एकजुटता की आवश्यकता बताई। वक्ताओं ने कहा कि समाज के विकास के लिए सभी लोगों को मिलकर कार्य करना होगा। इसके साथ ही सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ाने और युवाओं को संगठन से जोड़ने जैसे विषयों पर भी विचार व्यक्त किए गए।



अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद सुबोध कांत सहाय ने बैठक को संबोधित करते हुए समाज में बढ़ते बिखराव को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कायस्थ समाज अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहा है, लेकिन सामाजिक स्तर पर एकजुटता की कमी दिखाई देती है। उन्होंने समाज के लोगों से आपसी मतभेदों को दूर कर एक मंच पर आने का आह्वान किया।

सुबोध कांत सहाय ने कहा कि कायस्थ समाज के लोग शिक्षा, प्रशासन, राजनीति, सामाजिक सेवा और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके बावजूद समाज का संगठित होना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केवल व्यक्तिगत उपलब्धियां हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज के सामूहिक विकास के लिए भी सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे।



उन्होंने अपने संबोधन में सामाजिक और राजनीतिक एकजुटता पर विशेष जोर दिया। सुबोध कांत सहाय ने कहा कि समाज के लोगों को अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी संगठित रहने की आवश्यकता है। उन्होंने महासभा के पदाधिकारियों से संगठन के माध्यम से समाज के लोगों को जोड़ने और उनकी समस्याओं को सामूहिक रूप से उठाने का आह्वान किया।

बैठक में मौजूद पदाधिकारियों ने भी संगठन को मजबूत बनाने और समाज के भीतर आपसी संवाद बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। इस दौरान महासभा के सदस्यों ने समाज के हितों से जुड़े विषयों पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए। बैठक में यह संदेश दिया गया कि सामाजिक सहयोग, आपसी विश्वास और सामूहिक प्रयासों से ही संगठन को मजबूती प्रदान की जा सकती है।
दो दिवसीय कार्यक्रम के समापन पर अखिल भारतीय कायस्थ महासभा की ओर से समाज में एकजुटता बनाए रखने और सामाजिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष सुबोध कांत सहाय ने सभी सदस्यों से संगठन के प्रति सक्रिय रहने और समाज के विकास में योगदान देने की अपील की। धार्मिक आयोजन से शुरू हुआ यह दो दिवसीय कार्यक्रम सामाजिक एकता, संगठन की मजबूती और सामूहिक भागीदारी के संदेश के साथ संपन्न हुआ।

